TMC

  • टीएमसी सांसद सुष्मिता देव ने राज्यसभा और पार्टी से दिया इस्तीफा

    तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव ने बुधवार को उच्च सदन की सदस्यता के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की, जिसके बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। वह इस सप्ताह राज्यसभा और तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वाली पार्टी की दूसरी नेता हैं।  इससे पहले 8 जून को तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।...

  • सीपीएम, टीएमसी, जेएमएम सब कांग्रेस से नाराज

    विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की अहम बैठक सोमवार, आठ जून को दिल्ली में होगी। इस बैठक की योजना नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन के लिए लाए गए विधेयक को विफल कराने के बाद बनी थी। उस समय एक मोमेंटम विपक्ष का बना था लेकिन पांच राज्यों में हुए चुनाव के बाद व मोमेंटम खत्म हो गया है। विपक्षी की बड़ी पार्टियां चुनाव हार गई हैं और पार्टियों के बीच आपस में सिर फुटौव्वल अलग है। हर पार्टी को दूसरी पार्टी से शिकायत है। एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके ने अपने को विपक्ष की बैठक से अलग कर लिया...

  • दो विधायकों का तृणमूल तोड़ने का दावा

    कोलकाता। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए दो विधायकों और कुछ अन्य नेताओं ने पार्टी तोड़ने का दावा किया है। इससे पहले पार्टी से निकाले गए ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने सोमवार को तृणमूल के कई विधायकों के साथ बैठक की थी। इन दोनों ने स्पीकर से शिकायत की है कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधायक दल का नेता चुनने वाली चिट्ठी पर उन्होंने दस्तखत नहीं किया है। दोनों का कहना है कि उनके दस्तखत जाली हैं। इस मामले की जांच सीआईडी कर रही है और आठ जून को अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया है।...

  • तृणमूल सांसदों में सेंधमारी

    पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी का खेल शुरू हो गया है। उसका राजनीति का एक अपना म़ॉडल है और एक बंगाल मॉडल है। दोनों लगभग एक ही जैसे हैं। बंगाल में हर पार्टी के नेता को सत्ता में रहना होता है। जब तक सत्ता रहती है तभी तक वह शेर होता है। फालता सीट पर ममता बनर्जी के उम्मीदवार का मैदान छोड़ कर भागना इसका एक संकेत है। अब खबर है कि ममता बनर्जी के कई नेता और कई सांसद पाला बदलने की तैयारी कर रहे हैं। वे कह नहीं रहे हैं लेकिन परदे के पीछे से खेल शुरू...

  • लेफ्ट या टीएमसी का नहीं यह बंगाल मॉडल

    पश्चिम बंगाल की बात होती है तो अक्सर कहा जाता है कि यह लेफ्ट का मॉडल है या यह तृणमूल कांग्रेस का मॉडल है या यह कि तृणमूल ने सरकार में आने पर लेफ्ट का मॉडल अपना लिया आदि आदि। लेकिन असल में वहां लेफ्ट या तृणमूल का मॉडल नहीं चलता है वहां बंगाल का ही मॉडल चलता है। यह मौजूदा बंगाल का मॉडल है कि जिसकी सरकार बन जाए उसके साथ हो लो। बंगाल में मजदूर संगठन बहुत मजबूत रहे हैं लेकिन तभी तक जब तक लेफ्ट पार्टियों का शासन था। वामपंथी पार्टियों का शासन खत्म होने के साथ...

  • एक थीं ममता और एक हैं राहुल

    राहुल गांधी के फ़राख़-दिल मिज़ाज की बलैयां लेने का मन कर रहा है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में राहुल कह रहे थे कि ममता बनर्जी के पिछले पांच बरस का राजकाज एकदम चैपट था, क़ानून-व्यवस्था चरम बदहाली का शिखर छू रही थी और उन्हीं की वज़ह से भारतीय जनता पार्टी को राज्य में अपनी जड़ें इतनी गहराई तक जमाने का मौक़ा मिला। मगर जैसे ही तृणमूल कांग्रेस चारों खाने चित्त हुई और ममता ख़ुद भी अपना चुनाव हार गईं तो राहुल पूरे दमखम से यह कहते हुए उन की हिमायत में उतर आए कि बंगाल के नतीजे निर्वाचन आयोग के...

  • ममता ने भरोसा पहले गंवाया!

    भारत के कोई सत्तारूढ़ पार्टी चुनाव इसलिए नहीं हारती कि कोई विकल्प आ खड़ा हुआ है। उसका पतन तब होता है, जब विश्वास खत्म हो जाता है। और लगभग चुपचाप विकल्प शक्ल पा जाता है। यही आज के चुनाव नतीजों का लबोलुआब है। सत्ता बहसबाजी से नहीं, भरोसे के खिसकने से हारती है। राजनीति चालबाज हो सकती है। नेता उससे भी ज्यादा चालाक होते हैं। लेकिन एक क्षण ऐसा आता है जब जनता दोनों को असहज कर देती है। वह न बहस करती है, न अपने इरादे की घोषणा करती है। वह बस अपना विश्वास खींच लेती है। और जैसे...

  • बंगाल में कैसे जीती भाजपा?

    पश्चिम बंगाल की भौगोलिक और जनसंख्या संरचना को देख कर बहुत से राजनीतिक विश्लेषक और नेता भी यह मानते थे कि भारतीय जनता पार्टी को बहुत पहले पश्चिम बंगाल में चुनाव जीत जाना चाहिए था। पश्चिम बंगाल की सीमा बांग्लादेश से मिलती है, जहां से घुसपैठ होने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा होने का नैरेटिव बहुत दिनों से बनता रहा है। घुसपैठ के कारण और ऐतिहासिक रूप से मुस्लिम बहुलता की वजह से राज्य की जनसंख्या संरचना भाजपा के हिंदुत्व के नैरेटिव को सपोर्ट करती थी। इसके बावजूद भाजपा चुनाव नहीं जीत पाती थी। पिछले चुनाव में राष्ट्रवाद,...

  • पश्चिम बंगाल भी केसरिया रंग में

    सम्मिलित निष्कर्ष है कि बंगाल में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है और बंगाल के मतदाताओं ने परिवर्तन के लिए मतदान किया है। आजादी के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में हिंदुत्व की सोच वाली सरकार बनने की वास्तविक संभावनाएं सामने हैं। साथ ही 50 साल के बाद पहली बार केंद्र की विरोधी नहीं, बल्कि केंद्र के साथ समन्वय वाली सरकार बंगाल में बनती दिखाई दे रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा का मतदान संपन्न होने के बाद आए एक्जिट पोल के आंकड़े भारतीय जनता पार्टी के चुनाव जीतने का अनुमान जाहिर कर रहे हैं। एक्जिट पोल के...

  • तृणमूल ने भी इसी अंदाज में जवाब दिया

    ऐसा नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी और राइट विंग सोशल मीडिया हैंडल्स से फैलाई जा रही अफवाहों पर ममता बनर्जी की पार्टी ने चुप्पी साध ली। ममता की पार्टी ने भी उसी अंदाज में जवाब दिया। उसने अलग तरह से अफवाहें फैलाईं। पहले तो ममता की पार्टी के आईटी सेल से जुड़े एक व्यक्ति ने पोस्ट करके कहा कि भाजपा के 12 में से आठ सांसद ममता बनर्जी के संपर्क में हैं और चुनाव नतीजों के बाद पाला बदल कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो जाएंगे। इसके बाद सोशल मीडिया पोस्ट का सिलसिला शुरू हो गया। पुरानी तस्वीरें साझा...

  • बदलाव की बयार आंधी में बदलेगी!

    मतदान के इतने भारी भरकम आंकड़े का जो पहला मैसेज लोगों तक पहुंचा वह ये है कि लोग बदलाव चाहते हैं और परिवर्तन के लिए इतनी बड़ी संख्या में निकल कर वोट कर रहे हैं। दूसरा मैसेज यह है कि चुनाव आयोग की ओर से कराई गई एसआईआर के कारण फर्जी मतदाताओं के नाम कट गए हैं और अभी जो वोट डाल रहे हैं वो वास्तविक लोग हैं। पश्चिम बंगाल में बदलाव की बयार चल रही है। पहले चरण के मतदान में इसके बहुत स्पष्ट संकेत दिखे हें। अब अगर यह बयार आंधी में बदलती है तो अभूतपूर्व नतीजे आएंगे।...

  • ओह, बंगाल! सभी टूट पड़े

    स्वतंत्र भारत में ऐसा कभी नहीं हुआ। एक प्रदेश, एक मुख्यमंत्री और पूरी भारत सरकार, केंद्र की सभी संस्थाएं, राष्ट्रीय मीडिया सभी एक सुर में बंगाल, बंगाल का वह भौकाल बनाते हुए मानो विधानसभा चुनाव न हो, पानीपत की लड़ाई हो! भारत का प्रधानमंत्री, गृह मंत्री बंगाल पर टूट पड़ा, तो चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट मतदाताओं के दिल-दिमाग को झिंझोड़ते हुए। देश की संसद भी तड़का मारते हुए। राष्ट्रपति की भी कथा थी कि देखो, उनके साथ बंगाल में क्या होता है! सरकारी प्रोपेगेंडा, राष्ट्रीय मीडिया रत्ती भर पीछे नहीं! निशाने में कौन? एक बेचारी ममता बनर्जी और बेचारा...

  • बंगाल में सबकी पोल खुली

    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर असमंजस के बादल छंट गए हैं। लेकिन चुनाव की तैयारी के क्रम में कई संस्थाओं की पोल खुली है। चुनाव आयोग एक्सपोज हुआ है, जिसने बाकी राज्यों के मुकाबले पश्चिम बंगाल में अलग तरह से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का काम कराया और बाद में सीधे तृणमूल कांग्रेस का नाम लेकर सोशल मीडिया में पोस्ट की और हर किस्म की चुनावी गड़बड़ी के लिए सिर्फ एक पार्टी को दोषी ठहराया। सुप्रीम कोर्ट भी कहीं न कहीं कठघरे में है क्योंकि उसकी देख रेख में एसआईआर का काम हुआ और...

  • टीएमसी, भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प

    कोलकाता। मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर पश्चिम बंगाल में विवाद चल रहा है। इस विवाद के बीच चुनाव आयोग के कार्यालय के सामने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और राज्य की मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दोनों में झड़प भी हुई। बताया गया है कि तृणमूल कांग्रेस के बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ का एक समूह मतदाता सूची में गड़बड़ी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा था। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों पर पथराव किया। इससे वहां खड़े वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। बाद में भाजपा के कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए और प्रदर्शन...

  • कांग्रेस को तृणमूल और एनपीपी की चुनौती

    कांग्रेस पार्टी को कई राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के साथ साथ ऐसी पार्टियों से भी लड़ना पड़ता है तो भाजपा की विरोधी हैं या उससे दूरी बनाने की राजनीति करती हैं। ऐसी पार्टियों में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी मुख्य है। ये पार्टियां कई राज्यों के चुनावों में सिर्फ कांग्रेस पार्टी का नुकसान करने के लिए लड़ती हैं। अभी जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं उनमें पश्चिम बंगाल में तो खैर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है लेकिन असम में भाजपा और कांग्रेस आमने सामने लड़ रहे हैं।...

  • बंगाल चुनाव: टीएमसी ने सभी सीटों पर उतारे उम्मीदवार

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी भवानीपुर से विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए सभी 294 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी।  टीएमसी द्वारा जारी इस लिस्ट में ममता बनर्जी समेत पश्चिम बंगाल के कई दिग्गज टीएमसी नेताओं के नाम शामिल हैं, जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया है। बता दें कि सीएम ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा सीट से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगी। वहीं, हाल ही में टीएमसी में शामिल हुए पवित्र कर को नंदीग्राम से टिकट दिया गया है, जहां...

  • यूडीएफ में टीएमसी को जगह देने का मतलब

    राजनीति में कुछ भी उलटबांसी संभव है। कांग्रेस पार्टी इस समय भाजपा और एनडीए की पार्टियों के अलावा जिन पार्टियों की ओर से सबसे ज्यादा विरोध झेल ही है उनमें टॉप पर ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को तृणमूल से भी लड़ना है। लेकिन उसी तृणमूल कांग्रसे के साथ उसने केरल में समझौता कर लिया है। केरल में कांग्रेस ने ममता बनर्जी की पार्टी को यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ के सहायक दल के रुप में साथ जोड़ा है। कहा जा रहा है कि लेफ्ट के साथ रहे और दो बार से निर्दलीय विधायक का...

  • पश्चिम बंगाल में एसआईआर पर घमासान, टीएमसी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा चुनाव आयोग

    तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में जारी एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में चुनाव आयोग का रुख किया। टीएमसी के 10 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचा और इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई।   टीम की अगुवाई राज्यसभा में तृणमूल संसदीय दल के नेता डेरेक ओ’ ब्रायन ने की। उनके साथ लोकसभा में डिप्टी लीडर शताब्दी रॉय, कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा, प्रतिमा मंडल, सजदा अहमद, डोला सेन, ममता ठाकुर, साकेत गोखले और प्रकाश चिक बराइक भी मौजूद थे। प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को एक लिखित शिकायत सौंपी। उनका आरोप है कि बंगाल में एसआईआर के...

  • शत्रुघ्न सिन्हा आगे क्या करेंगे?

    पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने एक सीट छोड़ कर बिहार की किसी सीट पर प्रचार नहीं किया। एक सीट पर भी उन्होंने पार्टी से ज्यादा उम्मीदवार का प्रचार किया। उन्होंने पटना की कुम्हरार सीट के उम्मीदवार केसी सिन्हा को वोट देने की अपील की थी। गौरतलब है कि केसी सिन्हा शिक्षक रहे हैं और उनकी गणित की किताबें बिहार में कई पीढ़ियों ने पढ़ा है। वे कायस्थ जाति से आते हैं। तीसरी बात यह है कि वे जन सुराज पार्टी से चुनाव लड़ रहे थे। ध्यान रहे जन सुराज के संस्थापक प्रशांत...

  • बंगाल विधानसभा में जम कर हंगामा

    कोलकाता। देश के अलग अलग हिस्सों में रह रहे बंगाली प्रवासियों पर अत्याचार और वोट चोरी के कथित आरोपों को लेकर पश्चिम बंगाल विधानसभा में गुरुवार को जम कर हंगामा हुआ। विधानसभा में हंगामा इतना बढ़ गया है कि भाजपा के मुख्य सचेतक शंकर घोष को सदन से निलंबित किए जाने के बाद उनको मार्शल के जरिए सदन से बाहर निकलवाया गया। सदन की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारे लगाए। असल में गुरुवार को विधानसभा में बंगाली प्रवासियों पर हो रहे अत्याचारों पर चर्चा चलर ही थी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी...

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