नई दिल्ली। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया है कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते के बहुत करीब हैं। उन्होंने इसके साथ ही यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध बहुत खास हैं और इससे दुनिया के कई देश जलते हैं। एक मीडिया हाउस से बातचीत में गोर ने कहा कि अमेरिका की नजरों में भारत का ऐसा महत्व है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी प्रधानमंत्री मोदी से मिलना चाहते हैं।
गोर का यह कहना गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों से कई दूसरे देश ‘जलते’ हैं। गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं और दिसंबर में होने वाले जी20 सम्मेलन के दौरान जिन नेताओं से वह मिलना चाहते हैं, उनमें मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा। सर्जियो गोर ने ‘इंडिया टुडे’ को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप और मोदी के बीच अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते हैं। ऐसे में दिसंबर में जी20 समिट के लिए मोदी के फ्लोरिडा पहुंचने पर दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात भी हो सकती है।
हालांकि, मोदी और ट्रंप के बीच जी20 से अलग दोपक्षीय बैठक की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गोर ने ट्रंप के 2027 में भारत दौरे की संभावना के भी संकेत दिए। उन्होंने इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप 2020 में अपनी भारत यात्रा को अब भी याद करते हैं। अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, जब भी ट्रंप भारत की बात करते हैं तो वे यहां के लोगों से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने रिश्तों को याद करते हैं। गोर ने कहा कि अगला साल आने में ज्यादा समय नहीं है। हालांकि, उन्होंने ट्रंप के भारत दौरे की कोई तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बताया।
जहां तक भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार संधि की बात है तो इसे लेकर गोर ने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद संधि से जुड़े मुद्दों पर दोबारा काम किया जा रहा है। गोर ने उम्मीद जताई कि अगले कुछ महीनों में दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि इतने बड़े व्यापार समझौते में समय लगना सामान्य है।
व्यापार संधि में देरी को लेकर गोर ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता का उदाहरण दिया और कहा कि बड़े व्यापारिक समझौतों में कई साल लग सकते हैं। गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच अभी करीब 240 अरब डॉलर का व्यापार है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर पांच सौ अरब डॉलर करना है।
