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खालिद की जमानत पर सुप्रीम मतभेद

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के मामले में पुराने सिद्धांत को दोहराया है और कहा है कि आरोपियों को जमानत मिलनी चाहिए और जेल भेजना एक अपवाद की तरह होना चाहिए। इस क्रम में सर्वोच्च अदालत ने जमानत के मामले में अपने ही एक फैसले से असहमति जताई। सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने उमर खालिद की जमानत खारिज किए जाने पर सवाल उठाया और कहा कि फैसला देने वाली बेंच ने अदालत की बड़ी बेंच के फैसले का सम्मान नहीं किया।

दिल्ली दंगे की साजिश से जुड़े मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद को जमानत नहीं देने के फैसले पर एक दूसरी बेंच ने आपत्ति जताई है। सोमवार सैयद इफ्तिखार अंद्राबी से जुड़े नार्को टेररिज्म मामले पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि किसी आरोपी को जमानत देना एक नियम है, उसे जेल भेजना अपवाद होना चाहिए।

जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने केए नजीब मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया। बेंच ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में माना था कि मौलिक अधिकार का उल्लंघन होने पर अदालतें गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून यानी यूएपीए मामलों में जमानत दे सकती हैं। इस जिक्र के बाद दोनों जजों ने कहा कि खालिद की जमानत याचिका खारिज करते समय कोर्ट ने इस फैसले पर ध्यान नहीं दिया था।

जस्टिस भुइंया और जस्टिस नागरत्ना ने अपनी टिप्पणी जारी रखते हुए कहा कि जब कोई बड़ी बेंच फैसला सुना देती है तो छोटी बेंच को उसे मानना ही पड़ेगा। आजकल ऐसा देखा जा रहा है कि छोटी बेंच सीधे सीधे मना तो नहीं करतीं, लेकिन घुमा फिराकर बड़े फैसले के असर को कमजोर कर देती हैं। गौरतलब है कि इस साल चार जनवरी को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने फैसले की समीक्षा करने से भी मना कर दिया था। साथ ही कहा था कि दोनों आरोपी एक साल तक दिल्ली दंगे मामले में जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते। वैसे यूएपीए के मामले में सजा होने की दर डेढ़ से चार फीसदी के बीच है। इसका अर्थ है कि ज्यादातर लोग इस मामले में बरी होते हैं।

बहरहाल, उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद दिल्ली दंगों के आरोप में पांच साल तीन महीने से तिहाड़ में हैं। इन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उन्हें यूएपीए के तहत जमानत देने से इनकार किया गया था। उमर जमानत के लिए निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक छह बार याचिका लगा चुका है। गौरतलब है कि दिल्ली में फरवरी, 2020 में हिंसा भड़की थी। इसमें 53 लोगों की मौत हुई थी, जबकि ढाई सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

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