कोलकाता। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए दो विधायकों और कुछ अन्य नेताओं ने पार्टी तोड़ने का दावा किया है। इससे पहले पार्टी से निकाले गए ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने सोमवार को तृणमूल के कई विधायकों के साथ बैठक की थी। इन दोनों ने स्पीकर से शिकायत की है कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधायक दल का नेता चुनने वाली चिट्ठी पर उन्होंने दस्तखत नहीं किया है। दोनों का कहना है कि उनके दस्तखत जाली हैं। इस मामले की जांच सीआईडी कर रही है और आठ जून को अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया है।
इन दो विधायकों की तरह ही पार्टी से निकाले गए प्रवक्ता रिजू दत्ता ने दावा किया कि टीएमसी के 80 में से 50 से ज्यादा विधायक खुद को असली तृणमूल बताने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि ये सभी विधायक विधानसभा स्पीकर के पास जाएंगे और असली तृणमूल कांग्रेस होने का दावा करेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी होंगे, न कि शोभनदेव। रिजू दत्ता ने यह भी कहा कि यह समूह तृणमूल कांग्रेस के झंडे और चुनाव चिन्ह पर भी दावा करेगा।
इस बीच पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्य ने कहा है कि टीएमसी के लिए भाजपा के दरवाजे बंद हैं। उन्होंने कहा, ‘हमने किसी को बाहर से लाए बिना 207 का आंकड़ा छू लिया। इस बार हमारी राजनीतिक रणनीति जमीनी स्तर से शुरू हुई। हम ऐसे लोगों को अपनी पार्टी में कैसे शामिल कर सकते हैं जो दागी हैं? बीजेपी का तृणमूलीकरण कभी नहीं होगा’। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कहा कि ‘पार्टी के ज्यादातर विधायक दलबदल की अटकलों के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ ही रहेंगे और टीएमसी के पुराने नेता संगठन पर अपना नियंत्रण बनाए रखेंगे’।
