Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

भारत में AI की बीन, गधे भी संपेरे!

गुरुवार को मैंने भाजपा के सोशल मीडिया अकाउंटों के प्रोपेगेंडा का लबोलुआब जाना। भाजपा की प्रदेश इकाइयों के एक वीडियो में लाठियों से कांग्रेस की धुनाई है। दूसरे विज्ञापन में योद्धा हाथ में तलवार लिए हुए बेहद हिंसक अंदाज में चीखते हुए हमले के लिए तैयार हैं। कहीं बंदूकें हैं, कहीं ‘दिमागी नक्सलियों’ पर हमले का आह्वान। मतलब क्रूर फिल्मों, वेब सीरीज और हिंसक दृश्यों जैसी दृश्य-भाषा से राजनीतिक वीडियो, क्लिप और प्रचार सामग्री। जाहिर है, जनरेटिव AI ने ऐसी तस्वीर, आवाज और वीडियो बनाना इतना आसान किया है तो नतीजतन ऐसी सामग्री और सोशल मीडिया नैरेटिव। पहले जिस काम के लिए डिजाइनर, एडिटर और तकनीकी कौशल चाहिए था, उसके बजाय अब मात्र एक अच्छे प्रॉम्प्ट से यह गंदगी संभव है। असली वीडियो और AI से बने वीडियो का फर्क भी लगातार कठिन है।

सो लब्बोलुआब यह कि भारतीय राजनीति के लिए AI प्रचार का धांसू नया औजार है। वह वास्तविकता जैसी दिखने वाली कृत्रिम वास्तविकता बनाने की बीन भी है।

तभी इस सत्य को नोट करें कि अमेरिका और चीन भले AI को अधिकाधिक बुद्धिमान बनाने में दिल-दिमाग खपाए हुए हैं, वहीं भारत उसका यूजर बाजार है। और बाजार में इसकी उपयोगिता अलग ही लेवल की है। अर्थात AI से भारत पहले से मौजूद झूठ, मूर्खता और अज्ञान को अधिक उत्पादक बनाने का सुपर उपयोक्ता हो गया है। कहने को सरकारी आंकड़े भारत को AI कौशल और अपनाने में अग्रणी देश बताते हैं। भारतीय कंपनियां कई व्यावसायिक क्षेत्रों में AI लागू करने में गंभीर हैं। मगर भीड़ और बहुसंख्यक आबादी में वह जो पैदा कर रही है, वह दिमागी बर्बादी है, मानसिक पतन है और विश्वगुरुता के ढोल में पोल है।

इसलिए क्योंकि AI में भारत की दशा वही है जो दिल्ली में आयोजित वैश्विक शिखर सम्मेलन में जाहिर हुई थी। इसमें प्रधानमंत्री मोदी थे, दुनिया के दिग्गज थे। अरबों-खरबों डॉलर के इन्वेस्टमेंट कमिटमेंट्स की घोषणाएं हुईं। लोगों ने मान लिया कि भारत AI महाशक्ति हो गया! बावजूद सत्य क्या था? भारत के महंगे निजी विश्वविद्यालय ने चीन में बना Unitree Go2 रोबोटिक डॉग रखा। उसका नाम “Orion” रखा। विश्वविद्यालय की प्रतिनिधि ने कैमरे पर उसे अपने Centre of Excellence में विकसित बताया। कुछ ही मिनटों में कुत्ते की जन्मकुंडली निकल आई थी—मेड इन चाइना! मामला केवल एक विश्वविद्यालय और एक रोबोट कुत्ते का नहीं है। असली सवाल है—हम AI बना कितना रहे हैं? जवाब है, हम बना नहीं रहे हैं, हम अपनी बुद्धि, दिमाग, सत्य, ज्ञान, खोज को ही झूठ में खलास कर दे रहे हैं।

Exit mobile version