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  • सोशल मीडिया अकाउंट्स की सफाई

    भारतीय जनता पार्टी की नई टीम की जैसे ही घोषणा हुई वैसे ही एक कमाल का घटनाक्रम देखने को मिला। सोशल मीडिया के प्रभारी दीपक म्हस्के और उनके साथ सह प्रभारी बनाए गए चार लोग प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट और अरुण यादव के सोशल मीडिया अकाउंट डिएक्टिवेट हो गए। उनकी एक्सेस समाप्त कर दी गई। सब कयास लगाने लगे कि ऐसा क्या हो गया कि सोशल मीडिया की टीम का ही सोशल मीडिया अकाउंट बंद हो गया! बताया जा रहा है कि इन सभी पांच लोगों के कई पुरानी पोस्ट्स हैं, जो बहुत आपत्तिजनक हैं। कई पोस्ट में...

  • कंटेंट बिन कैसा प्रचार?

    भाजपा का नैरेटिव कंट्रोल प्रचार तंत्र की कमजोरी के कारण नहीं टूटा। यह कमजोर पड़ा है, क्योंकि प्रचार और जमीनी हकीकतों की दिशा विपरीत हो गई है। अवसरहीन पीढ़ी के बीच जुमलों को बेचना आसान नहीं है। यह अच्छी बात है कि भाजपा नेतृत्व को सियासी नैरेटिव पर अपना कंट्रोल टूट जाने का अहसास हुआ है। लेकिन जो वजह उसने समझी और जो समाधान ढूंढा, उससे नहीं लगता कि वह सतही आकलन से आगे बढ़ पाया है। पार्टी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय को संभवतः इस समझ के कारण हटाया गया कि नई पीढ़ी के मानस को नियंत्रित...

  • सोशल मीडिया पोस्ट हटवाने की चिंता

    छात्रों और युवाओं का आंदोलन खत्म होने के बाद स्थानीय निकाय प्रशासन ने जंतर मंतर की कमाल की सफाई कराई। आंदोलन से नामोनिशान मिटा दिए गए। सारे नारे और हाथ से बनाए पोस्टर हटा दिए गए हैं। लेकिन इतने पर मामला समाप्त नहीं हुआ है। दिल्ली पुलिस सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पोस्ट किए गए सारे नारे, मीम्स आदि हटवाने के लिए दबाव डाल रही है। पुलिस की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कहा गया है कि वे सारे पोस्ट हटाएं। हालांकि यह काम बहुत आसान नहीं होगा। सवाल है कि सरकार क्यों सोशल मीडिया पोस्ट...

  • मीडिया इधर का हो या उधर का, एकतरफा!

    चाहे कोई भी दल सत्ता में हो जब तक उसका शासन और प्रशासन आम जनता के प्रति जवाबदेह न हो तब तक वो कितना भी ढोल पीटता रहे, जनता उसके दावों पर विश्वास नहीं करती। आम जनता को बड़े स्तर के बड़े घोटालों से इतना सरोकार नहीं होता जितना उनकी रोज़ की ज़िंदगी में पुलिस और प्रशासन के भ्रष्टाचार से होता है। इस स्तर का भ्रष्टाचार, हुक्मरानों का अहंकार और आम मतदाता की उपेक्षा का ख़ामियाज़ा सीधा मुख्यमंत्री या प्रधान मंत्री को भुगतना पड़ता है। आज मीडिया दो खेमों में बंटा हुआ है। एक तरफ़ है निजी टीवी चैनल और...

  • फ्रांस ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मं जूरी दी

    फ्रांस की संसद ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मं जूरी दे दी है। बीएफएमटीवी ब्रॉडकास्टर ने यह जानकारी दी है। यह विधेयक एक सितंबर से लागू होगा। बीएफएमटीवी ने मंगलवार रात बताया कि विधेयक के समर्थन में 279 मत डाले गये जबकि 81 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट किया। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि नए कानून के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उपयोगकर्ता की उम्र सत्यापित करनी होगी और 15 साल से कम उम्र वालों को इससे रोकना होगा। Also Read : अनंतनाग में आतंकवादी हमला,...

  • नैरेटिव कंट्रोल का घमासान बढ़ेगा

    केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी दोनों की मुख्य चिंता यह हो गई है कि सोशल मीडिया का कंटेंट और उससे बनने वाले नैरेटिव को कैसे कंट्रोल किया जाए। आईटी कानून 2001 और आईटी नियम 2021 की कई धाराओं के तहत तो सरकार कंटेंट कंट्रोल करती है। लेकिन अब इसकी जरुरत ज्यादा हो गई है। इसका कारण यह है कि सोशल मीडिय में भाजपा की जो सेफ्टी वॉल थी यानी जो मजबूत दीवार थी वह टूट गई है। यूजीसी की नियमावली जारी होने के बाद भाजपा के सवर्ण समर्थकों का बुरी तरह से मोहभंग हुआ है। उनको ज्यादा बुरा इस...

  • बच्चों को बचाना जरूरी

    कोर्ट ने पाया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने एडिक्टिव डिजाइन फीचर्स बनाए। बच्चों पर उनके संभावित दुष्प्रभाव के बारे में उन्होंने पूर्व चेतावनी नहीं दी। इस कारण कोर्ट ने उन पर लगभग 60 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया है। सोशल मीडिया कंपनियों ने अपने प्लैटफॉर्म पर जानबूझ कर ऐसी तकनीकी व्यवस्था की है, जिससे यूजर्स को उन पर बने रहने की लत लग जाती है। खासकर बच्चों को इससे गहरा नुकसान हो रहा है। अमेरिका में कैलिफ़ोर्निया की एक अदालत ने पिछले हफ्ते इस संबंध में एक दूरगामी महत्त्व का फैसला दिया। उसमें सोशल मीडिया कंपनियों मेटा (इंस्टाग्राम) और गूगल...

  • सोशल मीडिया बैन रामबाण नहीं है

    देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का सम्मेलन चल रहा है। एआई के आर्थिक, सामरिक इस्तेमाल और उसके असर की व्याख्या हो रही है। दुनिया भर के विशेषज्ञ दिल्ली में हैं। और इसके समानांतर इस बात की भी चर्चा हो रही है कि बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल से कैसे बचाया जाए। जब से ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है और सभी सोशल मीडिया कंपनियों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी भी बच्चे का अकाउंट उनके प्लेटफॉर्म पर नहीं होना...

  • एक्स ने गलती मानी, अश्लील कंटेंट रोकेगा

    नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने अश्लील कंटेंट को रोकना शुरू कर दिया है और इस तरह के कंटेंट बनाने वाले अकाउंट्स को ब्लॉक करना भी शुरू कर दिया है। कंपनी ने कंटेंट के मॉडरेशन के मामले में अपनी गलती स्वीकार की है। इससे पहले कंपनी के सीईओ इलॉन मस्क ने गलती मानने से इनकार कर दिया था। उन्होंने एक पोस्ट में कहा था कि अगर कोई व्यक्ति किसी को चाकू मारता है तो अपराध चाकू का नहीं होता है, बल्कि चाकू वाले हाथ का होता है। लेकिन अब कंपनी ने गलती मानी है। एक्स ने कहा है कि...

  • बच्चों के लिए सोशल मीडिया बंद करने का सुझाव

    चेन्नई। मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी 16 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाई जाए। अदालत ने इससे जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने नाबालिगों को ऑनलाइन अश्लील कंटेंट आसानी से मिल जाने के मुद्दे पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की और सरकार को सुझाव दिया। याचिकाकर्ता एस विजयकुमार के वकील केपीएस पलानीवेल राजन ने ऑस्ट्रेलिया के नए कानून का हवाला दिया था। गौरतलब है कि...

  • सेना के जवान सोशल मीडिया इस्तेमाल कर सकेंगे

    नई दिल्ली। भारतीय सेना के जवानों को कुछ शर्तों के साथ सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी गई है। सैनिकों और सैन्य अधिकारियों को सोशल मीडिया के जरिए हनी ट्रैप में फंसाने की घटनाओं के बाद पांच साल पहले इसके इस्तेमाल के नियमों को बहुत सख्त कर दिया गया था। अब कुछ शर्तों के साथ पाबंदी हटाई गई है। नए दिशा निर्देशों के मुताबिक सेना के जवान इंस्टाग्राम पर रील, फोटो और वीडियो देख सकेंगे, लेकिन लाइक, कमेंट करने की अनुमति नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि जवान व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे ऐप्स पर...

  • सोशल मीडिया से बचपन बचाने की चुनौती

    हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने एक साहसिक प्रयोग शुरू किया है। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर तालाबंदी। 10 दिसंबर से। दुनिया का पहला देश, जिसने सोशल मीडिया के प्रकोप से बचपन को बचाने की कोशिश की है। मुकम्मल तरीके से। लिहाजा दुनिया भर की निगाहें इस छोटे से महाद्वीप पर हैं। मानों किसी असाध्य मर्ज पर, किसी नई दवा का असर देखने की प्रतीक्षा कर रहे हो। सवाल यह नहीं कि यह क़ानून कितना सख़्त है। सवाल तो यह है कि इस सख़्ती के पीछे छिपा दर्द, डर और दुविधा किसकी है? बच्चों...

  • सोशल मीडिया पर बने कानून

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह सोशल मीडिया में अश्लील कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए सख्त कानून बनाए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने यह भी कहा है कि इसके लिए बनाया जाने वाला कानून एससी, एसटी कानून की तरह सख्त होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार की सुनवाई में कहा कि सोशल मीडिया में अश्लील कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए रेगुलेशन की जरुरत है और किसी न किसी को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि आज कोई भी एक सोशल मीडिया का चैनल बना कर कुछ...

  • सोशल मीडिया धीरे-धीरे ढ़ह रहा है?

    एक समय था जब फॉलोअर्स की संख्या से क़ीमत तय होती थी। जिसके ज़्यादा अनुयायी, वही असरदार, वही ‘प्रासंगिक’। मतलब भीड़ का आकार ही पहचान था, पहुँच थी, यहाँ तक कि ताक़त भी। लेकिन ‘द न्यूर्याकर में छपे ताजा लेख (It’s Cool to Have No Followers Now)  ने बताया कि यह तर्क चुपचाप ढह चुका है। हज़ारों या लाखों फॉलोअर्स होना अब प्रभाव का प्रतीक नहीं, थकान का है। इंटरनेट अब प्रेतों से भरा पड़ा है, बॉट्स, घृणा से भरे फॉलोअर्स, निष्क्रिय खाते। बड़े पेज अब उस पुराने दौर के अवशेष हैं जब ध्यान का मतलब अभी भी स्नेह होता...

  • बिहार में सोशल मीडिया की ताकत

    अंतिम तौर पर क्या होगा यह नहीं कहा जा सकता है लेकिन कम से कम अभी सोशल मीडिया ने कई लोगों की टिकट रुकवा दी। बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे अनेक लोगों को लेकर ऐसा अभियान चला कि पार्टियों को टिकट रोकनी पड़ी। इसमें जन सुराज पार्टी भी है और भाजपा भी है तो राष्ट्रीय जनता दल भी है। इनके संभावित उम्मीदवारों के खिलाफ लोगों ने ज्यादातर सच्ची और कुछ गढ़ी गई बातों का ऐसा प्रचार किया कि पार्टियों ने उनको किनारे कर दिया। हालांकि हो सकता है कि अंतिम सूची में सबके नाम आ जाएं लेकिन...

  • यह मुद्दा जटिल है

    भारत में आईटी ऐक्ट को लेकर मतभेद हैं, तो उसकी वजह इस कानून में शामिल कुछ प्रावधानों के दुरुपयोग की शिकायतें हैं। यहां सरकारों ने असहमति को नियंत्रित करने के लिए ऐसे प्रावधानों का अक्सर इस्तेमाल किया है। कर्नाटक हाई कर्ट ने कहा है कि सोशल मीडिया विचारों का आधुनिक अखाड़ा है, जिसे अराजक स्वतंत्रता के हाल में नहीं छोड़ा जा सकता। अतः इस पर मौजूद कंटेंट को अवश्य विनियमित किया जाना चाहिए- खासकर अगर उसका संबंध महिलाओं से हो। कोर्ट ने कहा कि ऐसा ना करने का मतलब गरिमा के नागरिकों के अधिकार का हनन होगा। कोर्ट ने कहा-...

  • सोशल मीडिया का राक्षस भारी पड़ेगा

    भारत सरकार साजिश के नैरेटिव को जिस नेटवर्क से फैला रही है उसी नेटवर्क से वह कथित साजिश भी फैल रही है। अगर मतदाता सूची में गड़बड़ी या वोट चोरी का नैरेटिव फैल रहा है तो वह पारंपरिक मीडिया या टेलीविजन और अखबारों से तो फैल नहीं रहा है। वह तो सोशल मीडिया के जरिए ही फैल रहा है। सोशल मीडिया के जरिए ही ज्यादा से ज्यादा लोगों तक यह बात पहुंची है कि उनका वोट चोरी हो रहा है। यह बात भी लोगों तक पहुंची है कि अगर वोट चोरी हो गया यानी मतदाता सूची से नाम कट गया...

  • नेपाल की मौजूदा स्थिति पर भारत चिंतित

    नेपाल में सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन पर भारत सरकार ने मंगलवार को कहा कि हम पूरी स्थिति पर नजर बनाकर रखे हुए हैं। इस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को अपना आधिकारिक बयान जारी किया।  भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल में सोशल मीडिया पर लगे प्रतिबंध के खिलाफ जेन-जी के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस के रवैये पर दुख जताया। मंत्रालय ने कहा कि हमें इस बात का दुख है कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान कई युवा घायल हो गए, तो कई को अपनी जान गंवानी पड़ी। विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है...

  • सोशल मीडिया पर अदालत की नाराजगी

    बेंगलुरू। सुप्रीम कोर्ट के बाद अब कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी सोशल मीडिया के गैररजिम्मेदार रवैए पर नाराजगी जताई है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने बुधवार को कहा कि इन दिनों यूट्यूब पर झूठी और आपत्तिजनक बातें इतनी आसानी से फैल रही हैं कि इन्हें रोकने के लिए मानहानि का कानून काफी नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले एक स्टैंडअप कॉमेडियन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई थी और सरकार से इसे नियंत्रित करने के उपाय करने को कहा था। बहरहाल, कर्नाटक हाई कोर्ट ने कह, ‘लोग बेझिझक किसी को भी बदनाम कर रहे हैं और...

  • यह अब सामान्य है, ढर्रा है!

    साफ दिख रहा था, और वह असहज था तो चेताने वाला भी। उमस से भरी झुलसाती दोपहर में कुछ नौजवान लड़के और महिलाएं फुटपाथ पर चुपचाप खड़े थे, उनके पैरों के पास खाली डिब्बे, टेढ़ी-मेढ़ी बाल्टियाँ, प्लास्टिक की बोतलें थी। वे पानी के टैंकर का इंतज़ार कर रहे थे। न हड़बड़ी में थे, न बातचीत करते हुए- बस एक अजीब-सी ख़ामोशी, जो व्यवस्था, हालतों के आगे लाचारी से उपजी थी। हर कोई गर्दन झुकाए अपने मोबाइल की स्क्रीन में डूबा हुआ था। बड़े, चटक रंगों वाले फोन पर उनके पतले हाथों, और भी पतली ज़िंदगियों की उंगलियाँ स्वाभाविक गति से...

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