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सोनिया, राहुल के साथ क्या करेगी ईडी?

सोनिया

नेशनल हेराल्ड और एसोसिएटेड जर्नल्स का केस 2012 से चल रहा है। भाजपा के सुब्रमण्यम स्वामी ने दिल्ली की एक अदालत में इसके खिलाफ मुकदमा दायर किया था, जिसने संज्ञान लिया और उसके बाद केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने कार्रवाई शुरू की। यह बहुत अनोखा केस है, जिसमें पैसे का कोई लेन देन नहीं हुआ है और इस आधार पर कांग्रेस का कहना है कि जबरदस्ती परेशान करने के लिए जांच चल रही है। दूसरी ओर स्वामी और भाजपा के नेताओं का कहना है कि नेशनल हेराल्ड की हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति हड़पने के लिए यंग इंडियन नाम से एक कंपनी बनाई गई, जिसमें 76 फीसदी ही हिस्सेदारी सोनिया और राहुल गांधी की है।

इस कंपनी को महज 50 लाख रुपए में हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति वाले एसोसिएटेड जर्नल्स का मालिकाना हक मिल गया। कांग्रेस इसको खारिज कर रही है। उसका कहना है कि नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली कंपनी को चलाने के लिए कांग्रेस ने 90 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था उस कर्ज को इक्विटी में ट्रांसफर किया गया है। यह भी कहा जा रहा है कि यंग इंडियन नॉन प्रोफिट कंपनी है, जिसमें किसी की कितनी भी हिस्सेदारी उसको इससे एक रुपए का लाभ नहीं मिलेगा।

दोनों तरफ के दावे और प्रतिदावे के बीच पिछले 11 साल से इसकी जांच चल रही थी। स्वामी की ओर से मुकदमा करने के बाद के दो साल छोड़ दें क्योंकि तब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली ही सरकार थी। लेकिन पिछले 11 साल से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है।

सवाल है कि इतने सालों से क्या जांच चल रही है, जो किसी मुकाम तक नहीं पहुंच रही है? ईडी ने पहले जांच की, सारे दस्तावेज देखे और उसके बाद पूछताछ शुरू की। उसमें भी उसको आठ साल लगे। 2022 के जून में राहुल गांधी को समन किया गया। लगातार पांच दिन तक ईडी ने उनसे पूछताछ की। पांच दिन में कोई 50 घंटे में उनसे सैकड़ों सवाल पूछे गए। उन पांच दिनों में दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जोर आजमाइश भी चलती रही। रोज कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी मुख्यालय, 24 अकबर रोड पर इकट्ठा होते थे और पुलिस उनको ईडी कार्यालय की ओर से जाने से रोकती थी।

सोनिया-राहुल गांधी की ईडी जांच: गिरफ्तारी या आरोपपत्र?

खूब राजनीतिक विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद ईडी ने सोनिया गांधी को तलब किया। जुलाई 2022 में सोनिया से लगातार तीन दिन पूछताछ हुई। उनसे भी 20 घंटे से ज्यादा पूछताछ हुई और 50 से ज्यादा सवाल पूछे गए। इसके बाद अगस्त के पहले हफ्ते में ईडी ने राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बुलाया और करीब सात घंटे तक पूछताछ की।

इतना ही नहीं कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे मोतीलाल वोरा का 2020 में निधन हो गया था लेकिन 2022 में सोनिया और राहुल गांधी से पूछताछ में उनके नाम का भी कई बार जिक्र आया और एजेंसी के सूत्रों के हवाले से खबर आई कि सोनिया व राहुल ने कई चीजों की जिम्मेदारी उनके ऊपर डाली थी। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई। कांग्रेस पार्टी की एक अहम बैठक के दिन ईडी ने कांग्रेस नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी पूछताछ की। उसी साल खड़गे कांग्रेस के अध्यक्ष बने। यानी जितने लोग यंग इंडियन कंपनी में निदेशक हैं या किसी तरह से जुड़े हैं, शेयरधारक हैं उनसे ईडी ने पूछताछ की।

इसके बाद अचानक चारों तरफ सन्नाटा छा गया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें घट गईं और कांग्रेस की सीटें बढ़ कर एक सौ के करीब पहुंच गईं तब ऐसा लगा कि अब शायद इस केस में कुछ नहीं हो। लेकिन अब अचानक ईडी ने इस मामले में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। इसमें सोनिया और राहुल गांधी को नंबर एक और नंबर दो आरोपी बनाया गया है। इनके अलावा सैम पित्रोदा और सुमन दुबे को भी आरोपी बनाया गया है।

आरोपियों की गिरफ्तारी के बगैर आरोपपत्र दाखिल किए जाने से सुब्रमण्यम स्वामी भड़के हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सवाल उठाया कि सोनिया और राहुल गांधी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? उन्होंने पूछा कि क्या मोदी ने उनकी गिरफ्तारी रुकवाई है और मोदी ने गिरफ्तारी रुकवाई है तो उनकी भी गिरफ्तारी होनी चाहिए। सवाल है कि स्वामी के मुताबिक यह इतना गंभीर मामला है और गड़बड़ी के पर्याप्त सबूत हैं तो फिर एजेंसी ने क्यों गिरफ्तार नहीं किया? क्या किसी राजनीतिक कारण से सोनिया और राहुल गांधी पर गिरफ्तारी की तलवार लटकाई गई है और गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है?

राहुल गांधी ने जून 2022 की पूछताछ के कुछ दिन बाद एक कार्यक्रम में कहा था कि ईडी के लोग पूछताछ कर रहे थे तो उन्होंने एक सेल यानी कोठरी देखी, जिसमें गिरफ्तार लोगों को रखा जाता था। राहुल ने कहा कि उसे देख कर लगा कि उनके परदादा 12 साल ऐसी ही कोठरी में रहे हैं तो 10 साल उनको भी रहना चाहिए। यानी राहुल गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं। पर एजेंसी ने गिरफ्तार नहीं किया।

अब आरोपपत्र दाखिल होने के बाद गिरफ्तारी मुश्किल है क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का एक स्पष्ट आदेश है। हालांकि कई मामलों में ईडी ने आरोपपत्र दाखिल करने के बाद गिरफ्तारी की है। सो, गिरफ्तारी होगी या नहीं होगी यह सवाल अलग है। पहला सवाल तो यह है कि आरोपपत्र से पहले गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? आमतौर पर ईडी जब पूछताछ के लिए बुलाती है तो दूसरा या तीसरी पूछताछ के बाद गिरफ्तारी निश्चित होती है। जितने भी नेताओं को ईडी ने पूछताछ के लिए बुलाया उसमें शायद की कोई अपवाद होगा, जिसकी गिरफ्तारी नहीं हुई।

सो, जाहिर है कि सोनिया और राहुल गांधी के मामले को अलग तरीके से हैंडल किया गया। उनके ऊपर जांच चलती रही, कार्रवाई की तलवार लटकी रही लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई। अब अगला सवाल यह है कि क्या ऐसा हो सकता है कि सीधे अभियोजन शुरू हो जाए और कोर्ट से इस मामले में धन शोधन कानून के तहत दोनों को सजा हो जाए? क्या इसके लिए आगे की कोई टाइमलाइन तय की गई और उस टाइमलाइन पर एक निश्चित समय आने के बाद ही गिरफ्तारी होगी?

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Pic Credit : ANI

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