Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

बांग्ला भद्रलोक के वोट की राजनीति

नितिन नबीन के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के देश की राजनीति पर कोई असर हो या नहीं हो लेकिन पश्चिम बंगाल की राजनीति में इसके असर की चर्चा शुरू हो गई है। ध्यान रहे नितिन नबीन कायस्थ हैं और कायस्थों की मौजूदगी पूर्वी भारत के राज्यों में ही है। बिहार, झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल और ओडिशा में ठीक ठाक संख्या में कायस्थ हैं। आबादी कम होने के बावजूद कायस्थ इन राज्यों की राजनीति को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते रहते हैं। बीजू पटनायक और उनके बेटे नवीन पटनायक का लंबे समय तक ओडिशा में राज रहा है। बिहार में भी महामाया प्रसाद सिन्हा बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं। पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु का सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड है। अभी पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और उससे पहले नितिन नबीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं। बिहार के ही मंगल पांडेय वहां के प्रभारी हैं। सो, बंगाल के चुनाव को यह घटनाक्रम निश्चित रूप से किसी न किसी स्तर पर प्रभावित करेगा।

ध्यान रहे पश्चिम बंगाल का भद्रलोक कायस्थ और ब्राह्मणों से मिल कर ही बना है। भद्रलोक आमतौर पर बंगाल की कला, संस्कृति, परंपरा इत्यादि का पोषक होता है। वह समझता है कि बंगाली अस्मिता की रक्षा का भार उसके कंधे पर है। इसलिए वह आमतौर पर भाजपा को वोट नहीं करता है। पहले कम्युनिस्ट पार्टियों को और अब ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को उनका समर्थन मिलता है। भद्रलोक के अलावा जो दूसरा वर्ग है वह छोटोलोक का है। इस छोटोलोक का वोट मोटे तौर पर भाजपा को मिलता है। पश्चिम बंगाल की दलित आबादी करीब 18 फीसदी और आदिवासी आबादी छह फीसदी है। इसका बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ जाता है। उत्तरी बंगाल के आदिवासी बहुल इलाकों में तो भाजपा बहुत मजबूत है।

इस बार भी भाजपा को उम्मीद है कि दलित, आदिवासी और पिछड़ी जातियों के बड़े हिस्से का वोट उसको मिलेगा। उसे भद्रलोक में ममता बनर्जी के वोट में सेंध लगानी है। ब्राह्मण हो सकता है कि ममता बनर्जी को नहीं छोड़ें लेकिन नितिन नबीन के जरिए भाजपा कायस्थ वोट तोड़ सकती है। हालांकि ममता बनर्जी के पास शत्रुघ्न सिन्हा के रूप में एक काट है। शत्रुघ्न सिन्हा ओरिजिनल बिहारी बाबू हैं और अस्मिता की राजनीति में वे किसी भी कायस्थ या बिहारी नेता से बड़े ठहरते हैं। वे पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से दूसरी बार सांसद का चुनाव जीते हैं। अभी वे पूरी तरह से सक्रिय भी हैं। आमतौर पर विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को किसी की जरुरत नहीं होती है। लेकिन अगर इस बार जरुरत पड़ी तो शत्रुघ्न सिन्हा भी हैं और कीर्ति आजाद भी हैं। कीर्ति आजाद क्रिकेटर रहे हैं, बिहार के हैं और मैथिली ब्राह्मण हैं। वे वर्धमान की सीट से तृणमूल कांग्रेस के सांसद हैं। इस बार भाजपा की ओर से नितिन नबीन और मंगल पांडेय तो ममता बनर्जी की ओर से शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद भी मैदान में होंगे।

Exit mobile version