Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

बिना पैंदे का विकास आंकड़ा!

मोदी सरकार की साख का भगवान मालिक है। वह ज्योंहि कोई दांवा, आकंड़ा बताती है तुरंत मखौल शुरू हो जाता है। सवाल-दर-सवाल उठते है। खास कर आंकड़ों के मामले में। भारत सरकार ने 31 अगस्त को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के आर्थिक विकास के आंकड़े जारी किए। लोग ताली बजाने के हैरान अधिक थे। ईरान और अमेरिका के युद्ध के बीच जब सारी दुनिया में आपूर्ति शृंखला प्रभावित थी तब सरकार ने विकास दर 7.8 फीसदी बताई। हर बार की तरह सरकार के सांख्यिकी विभाग ने आंकड़ा जारी करके छोड़ा नहीं। इस बार आंकड़े का व्यापक प्रचार किया गया। खुद प्रधानमंत्री ने वीडियो बना कर बताया कि कैसे भारत ने इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर उन सबका मजाक उड़ाया, जो भारत की अर्थव्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने इतनी बड़ी उपलब्धि के लिए देश के लोगों को बधाई दी।

शुरुआत में जब यह आंकड़ा आया तब कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां भी बैकफुट पर थीं। सिर्फ यह कहा जा रहा था कि यह जॉबलेस ग्रोथ है। कांग्रेस ने इसकी आलोचना में जो पहली बात कही वह ये थी कि कृषि सेक्टर 3.6 फीसदी की दर से ही बढ़ा है और माइनिंग सेक्टर भी पिछड़ गया है। लेकिन अचानक अगले दिन पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने इसे एक नया ट्विस्ट दिया। उन्होंने कहा कि विकास दर का वास्तविक आंकड़ा 7.8 फीसदी नहीं, बल्कि सिर्फ 2.6 फीसदी है। कितना बडा फर्क! उन्होने व्याख्या में दो टूक तर्क दिया कि पिछले साल यानी वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में सरकार ने बताया था कि कुल जीडीपी 86 लाख करोड़ रुपए उत्पादित हुई है। लेकिन बाद में सरकार ने इसे संशोधित किया। बाकायदा कहा कि कुल जीडीपी 80 लाख करोड़ रूपए ही है। इस साल पहली तिमाही की जीडीपी 88 लाख करोड़ है। संशोधित जीडीपी के आधार पर यह विकास दर 7.8 फीसदी बनती है। लेकिन संशोधन से पहले जो 86 लाख करोड़ की जीडीपी का आंकड़ा था उसके आधार पर देखें तो 88 लाख करोड़ का आंकड़ा सिर्फ 2.6 फीसदी की दर से बढ़ा है। उनकी इस व्याख्या के बाद से जीडीपी आंकड़ों पर बहस छिड़ी है।

सरकार का कहना है कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर जीडीपी के आकलन का आधार वर्ष बदला है। पिछले साल दो तिमाही तक पुराने आधार वर्ष यानी 2011-12 के आधार पर आकलन किया जाता था, जबकि अब 2021-22 के आधार पर वर्ष पर आकलन किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि चूंकि बदले हुए आधार वर्ष पर इस साल आकलन हुआ है इसलिए तुलना के लिए बदले हुए आधार वर्ष पर आधारित पिछले साल के आंकड़ों का ही इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार के मुताबिक बदले हुए आधार वर्ष के आधार पर आकलन करते हैं तो पिछले साल की पहली तिमाही का जीडीपी का आंकड़ा 80 लाख करोड़ का बनता है और उसी आधार पर इस साल की पहली तिमाही का आंकड़ा 88 लाख करोड़ का बनता है इसलिए विकास दर 7.8 फीसदी है। यह तर्क भी अपनी जगह सही है कि मगर तब जब इस साल का आंकड़े बदले हुए आधार वर्ष का है तब भला उसकी तुलना पुराने आधार वर्ष के आंकड़े से नहीं की जा सकती है।

लेकिन इस बीच कांग्रेस को मौका मिला।  बारीक विश्लेषण के बाद कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि पिछले चार साल में भारत की अर्थव्यवस्था में 43 लाख करोड़ रुपए की कमी आई है। वे सरकार से पूछ रहे हैं कि आधार वर्ष किसी साल को बनाएं लेकिन यह समझाएं कि देश की अर्थव्यवस्था इतनी पीछे कैसे जा रही है? बहरहाल, अगर सरकार का 88 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा मानें और यह भी मानें कि पूरे साल यही विकास दर रहेगी तब भी पूरे साल का आंकड़ा 352 लाख करोड़ रुपए का ही बनेगा। यह चार ट्रिलियन डॉलर से बहुत कम है। अब इस आधार पर भारत क्या दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने रहने का दावा कर सकता है? वह दावा पूरी तरह धराशायी है। अगर सरकार की इस बात को मान भी लिया जाए की नई सीरीज आने की वजह से विकास दर का अंतर दिख रहा है तब भी इस बात का क्या जवाब है कि देश की अर्थव्यवस्था इतना पीछे क्यों जा रही है? सरकार अगर चाहती है कि लोग उसके आंकड़े पर यकीन करें तो उसे बताना होगा कि नई सीरीज में क्या बदला है, क्या हटाया है, क्या जोड़ा है, जिसकी वजह से अर्थव्यस्था पीछे जा रही है?

Exit mobile version