असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ मतदान से दो दिन पहले कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उसकी बातें बहुत डैमेजिंग थी। सरमा ने बहादुरी से उन आरोपों का सामना किया और जैसी उनकी प्रकृति है उन्होंने 24 घंटे के अंदर पुलिस दिल्ली भेज दी। पवन खेड़ा को भी पता है क्योंकि पहले भी एक बार असम पुलिस उनको गिरफ्तार करने दिल्ली आई थी और भारी ड्रामे के बाद उनको हवाईअड्डे से छुड़ाया गया था। इसलिए वे असम पुलिस के आने से पहले हैदराबाद चले गए। वहीं की अदालत में उन्होंने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की और उनको राहत मिल भी गई। लेकिन उसके साथ ही दिल्ली में दो तरह की चर्चा चली। एक तो चर्चा कांग्रेस को लेकर थी कि कांग्रेस के तमाम महासचिवों और राज्यसभा सीट के दावेदारों ने पवन खेड़ा को अकेले छोड़ दिया। हालांकि बाद में अभिषेक सिंघवी उनको कानूनी राहत दिलाने के लिए आगे आए। लेकिन उससे ज्यादा चर्चा इस बात की हुई कि क्या हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ पार्टी के अंदर से कोई साजिश हुई है।
इस बात की चर्चा ज्यादा तेज है कि भाजपा के ही किसी एक नेता ने या कुछ नेताओं ने मिल कर हिमंत बिस्वा सरमा का कद कम करने की साजिश रची। चुनाव से ऐन पहले उनकी पत्नी के तीन पासपोर्ट वाली खबर और अमेरिका के वायोमिंग में 52 हजार करोड़ रुपए की कंपनी के कागजात पवन खेड़ा को मुहैया कराए गए। कहा जा रहा है कि कागज सही हैं या गलत इसका पता तो बाद में चलेगा लेकिन उससे पहले चुनाव में इसका असर हो जाएगा। इससे हिमंता की आक्रामक शैली पर निश्चित रूप से असर हुआ और वे बैकफुट पर आए। इसके बावजूद अगर वे चुनाव जीत जाते हैं तो उनके खिलाफ साजिश करने वालों को ज्यादा बड़ा झटका लगेगा। हालांकि अगला दांव यह कहा जा रहा है कि छवि बिगाड़ने का मकसद सिर्फ चुनाव में कमजोर करना नहीं, बल्कि चुनाव के बाद दागदार छवि के नेता को कैसे सीएम बनाया जाए, इसका नैरेटिव चलाने का है। ध्यान रहे पिछली बार सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में चुनाव हुआ था और सरमा सीएम बने थे।
