Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

भाजपा के साथ दिखना सपा के लिए आत्मघाती

कहा जा रहा है कि महिला आरक्षण में संशोधन और परिसीमन बिल के लिए सरकार ने समाजवादी पार्टी को तैयार कर लिया है। यह दावा सरकारी सूत्रों के हवाले से किया जा रहा है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखी चिट्ठी में इसका हवाला भी दिया है कि सरकार ने समाजवादी पार्टी से बात की है। लेकिन क्या सचमुच समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन बिल पर सरकार का साथ दे सकती है? यह बड़ा सवाल है और बड़ा राजनीतिक फैसला होगा, जिसका असर उत्तर प्रदेश के अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा।

कहा जा रहा है कि सरकार की ओर से सपा को समझाया गया है कि परिसीमन होने पर उत्तर प्रदेश में लोकसभा की सीटें 80 से बढ़ कर 120 हो जाएंगी और विधानसभा की सीटें 403 से बढ़ कर छह सौ हो जाएंगी। कहा जा रहा है कि सपा इससे कैसे इनकार कर सकती है कि राज्य का प्रतिनिधित्व बढ़े। सुनने में यह बात अच्छी लग सकती है। लेकिन अभी की राजनीति को देखते हुए अखिलेश यादव के लिए यह अच्छा प्रस्ताव नहीं है।

गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी हर स्थिति में परिसीमन का विरोध करेगी। इसका कारण यह है कि कांग्रेस को पता है कि बिल पास होने के बाद सरकार अपने हिसाब से परिसीमन कराएगी और तब लोकसभा और विधानसभा सीटों की जो संरचना होगी उसमें विपक्ष के जीत कर बहुमत हासिल करने की संभावना बहुत कम रह जाएगी। तभी यह तय है कि कांग्रेस इस बिल के खिलाफ वोट करेगी। क्या ऐसी स्थिति में समाजवादी पार्टी यह अफोर्ड कर सकती है कि वह लोकसभा और राज्यसभा में भाजपा के साथ वोटिंग करे? राज्यसभा चुनाव में भाजपा के बनाए सांसद परिमल नाथवानी के बेटे धनराज नाथवानी को टिकट देकर सपा और गलती कर चुकी है। परिसीमन पर सरकार का साथ देना दूसरी बड़ी गलती होगी। यह सही है कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के पास अभी विकल्प नहीं है। लेकिन इतना खुल कर भाजपा के साथ जाने से आने वाले दिनों में उनकी वही स्थिति हो सकती है, जो बसपा की हुई है।

Exit mobile version