जिस समय भारतीय जनता पार्टी का संगठन पर्व चल रहा था यानी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो रहा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नितिन नबीन को कुर्सी पर बैठाया, उनके पीछे खड़े हुए और उससे पहले कहा कि नितिन नबीन उनके भी बॉस हैं और पूरी पार्टी नितिन नबीन के नाम के नारे लगा रही थी। उसी समय राहुल गांधी द्वारा नियुक्त किए गए बिहार के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू पटना पहुंचे। पटना हवाईअड्डे पर उनको रिसीव करने के लिए सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम पहुंचे थे। राजेश राम के साथ भी कोई व्यक्ति नहीं था। कांग्रेस का एक भी नेता हवाईअड्डे पर नहीं पहुंचा।
बाद में कांग्रेस की टिकट से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके एक नेता ने सोशल मीडिया पर फोटो डाली और तंज करते हुए लिखा, ‘बिहार चुनाव की अपार सफलता के बाद प्रभारी महोदय पहली बार पटना पहुंचे तो हवाईअड्डे पर प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी दोनों ने एक दूसरे का स्वागत किया’। असल में चुनाव से ठीक पहले राहुल गांधी ने पता नहीं किस रणनीति के तहत तत्कालीन अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह को हटा दिया था और उनकी जगहल राजेश राम को अध्यक्ष बनाया था। इसी तरह मोहन प्रकाश की जगह अल्लावरू प्रभारी बने थे। दोनों की राजनीति का लब्बोलुआब यह था कि कांग्रेस 70 की जगह 61 सीटों पर लड़ी, जिसमें 10 पर दोस्ताना मुकाबला हुआ और 19 की जगह सिर्फ छह सीट जीती। अब वो छह विधायक भी लापता हैं और प्रदेश अध्यक्ष के बुलाए किसी कार्यक्रम में नहीं शामिल होते हैं। खबर है कि ये छह विधायक सत्तारूढ़ गठबंधन में भाजपा या जदयू की ओर जाने का रास्ता तलाश रहे हैं।
