bihar politics

  • बिहार कांग्रेस के प्रभारी और अध्यक्ष से नाराजगी

    जिस समय भारतीय जनता पार्टी का संगठन पर्व चल रहा था यानी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो रहा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नितिन नबीन को कुर्सी पर बैठाया, उनके पीछे खड़े हुए और उससे पहले कहा कि नितिन नबीन उनके भी बॉस हैं और पूरी पार्टी नितिन नबीन के नाम के नारे लगा रही थी। उसी समय राहुल गांधी द्वारा नियुक्त किए गए बिहार के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू पटना पहुंचे। पटना हवाईअड्डे पर उनको रिसीव करने के लिए सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम पहुंचे थे। राजेश राम के साथ भी कोई व्यक्ति नहीं था। कांग्रेस का एक भी...

  • भाजपा, जदयू में शह मात का खेल

    बिहार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यू के बीच शह मात का खेल चल रहा है। भाजपा इंतजार में बैठी है कि नीतीश कुमार सेहत के हवाले रिटायर हों तो भाजपा का सीएम बने और दूसरी ओर नीतीश कुमार कड़ाके की ठंड में समृद्धि यात्रा पर निकल गए। वे पूरे प्रदेश की यात्रा करेंगे। भाजपा का इंतजार लंबा होता जा रहा है। इस बीच जनता दल यू के नेताओं ने अपने विधायकों की संख्या बढ़ा कर सबसे बड़ी पार्टी बनने का दांव खेलने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि भाजपा नेता इस गेम से परिचित हैं इसलिए...

  • चिराग, कुशवाहा और मांझी की खींचतान

    बिहार में राज्यसभा की एक सीट को लेकर चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी के बीच खींचतान चल रही है। उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा सांसद हैं। लोकसभा का चुनाव हारने के बाद पिछले साल उनको राज्यसभा भेजा गया था। उनका कहना है कि उनसे कमिटमेंट है। पिछली बार उनको चार साल की बजाय दो साल वाली राज्यसभा दी गई थी और कहा गया था कि 2026 में उनको फिर भेजा जाएगा। हालांकि उनकी पत्नी विधायक हो गई हैं और उन्होंने अपने बेटे को बिना विधायक बने ही मंत्री बना दिया है। इसका मतलब है कि उनको एक विधान परिषद...

  • जदयू ने भाजपा की लाइन नहीं पकड़ी

    संसद में वंदे मातरम पर हुई चर्चा में भाजपा के साथ साथ उसकी लगभग सभी सहयोगी पार्टियों ने उसके हिसाब से भाषण दिया। सांसदों की संख्या के लिहाज से तीन सबसे बड़ी सहयोगी पार्टियों में से तेलुगू देशम पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास ने भी भाजपा के हिसाब से भाषण दिया लेकिन जनता दल यू ने अलग लाइन ली। जदयू ने यह नहीं कहा कि कांग्रेस पार्टी ने वंदे मातरम के चार अंतरे हटाए और उसने जिन्ना या मुस्लिम लीग के आगे सरेंडर किया। भाजपा की कोशिश इसी राजनीतिक लाइन को स्थापित करने की थी। जनता दल यू की...

  • गोली की रफ्तार से हुआ सुजीत सिंह का काम

    बिहार में इस बार विधायक बने सुजीत सिंह मंत्री नहीं बन पाए हैं। इससे अनेक लोगों में निराशा हुई है। एक बड़ा समूह चाहता था कि भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी रहे सुजीत सिंह को कोई अहम मंत्रालय मिले। वे भले पहली बार के विधायक हैं लेकिन प्रशासनिक अनुभव बहुत बड़ा है। बहरहाल, वे मंत्री नहीं बने लेकिन उनके विधायक बनने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से लेकर विधायक बनने तक का काम गोली की रफ्तार से हुआ। वैसे उनकी पत्नी स्वर्णा सिंह पहले से जिस सीट से विधायक थीं वे वहीं से...

  • भाजपा-जदयू में बड़ा बनने की होड़

    यह कमाल की बात है, जिसे बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन की दोनों बड़ी पार्टियां यानी भाजपा और जदयू के नेता स्वीकार नहीं कर रहे हैं लेकिन यह हकीकत है कि दोनों में बड़ा बनने की होड़ है, जो पहले दिन से शुरू हो गई है। विधायकों की संख्या के लिहाज से भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। उसे जदयू से चार सीटें ज्यादा मिली हैं। इस आंकड़े के आधार पर चुनाव के बाद से यह खबर खूब चली कि भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाएगी। इसके बाद यह भी अफवाह यहां वहां फैलाई गई कि भाजपा और जनता दल यू में ढाई-ढाई साल...

  • तेजस्वी को किस बात की जल्दी थी?

    तेजस्वी यादव को किस बात की जल्दी थी? यह लाख टके का सवाल है। उन्होंने चुनाव नतीजों के तीन दिन बाद ही समीक्षा बैठक बुलाई और उसके साथ ही विधायक दल की बैठक करा कर नेता भी चुन लिए गए। तत्काल पार्टी की ओर से कह दिया गया कि चूंकि राजद के 25 विधायक हैं इसलिए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद पर पार्टी का दावा बनता है। राजद की ओर से विधायक दल की बैठक में तेजस्वी को नेता चुने जाने के बाद कहा गया कि विधानसभा गठित होने की स्पीकर का चुनाव हो जाने के बाद पार्टी तेजस्वी के...

  • बिहार में भाजपा के लिए रास्ता

    बिहार में पहली बार विधायकों की संख्या के लिहाज से भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनी है। यह लंबे प्रयासों और दीर्घकालिक राजनीति का परिणाम है। जिस समय भाजपा बिहार विधानसभा में अच्छे खासे अंतर से दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनती थी तब भी वह तीसरे नंबर की पार्टी के नेता नीतीश कुमार का चेहरा आगे करके राजनीति करती थी। भाजपा के उस समय के प्रदेश और देश के नेताओं को अंदाजा था कि मंडल की राजनीति साधने के लिए उनको एक ऐसे चेहरे की जरुरत है। अब वह जरुरत क्रमशः कम होती जा रही है। इसके कई कारण...

  • आरके सिंह को भाजपा ने कोई जगह नहीं दी

    पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और नरेंद्र मोदी की सरकार में दो बार मंत्री रहे आरके सिंह बागी तेवर दिखा कर भाजपा को झुका लेने की सोच रहे हैं लेकिन भाजपा ने उनको कोई जगह नहीं दी है। उनके बगावती तेवर के बाद भाजपा ने बिहार के लिए चुनाव अभियान समिति का गठन किया, जिसमें 40 से ज्यादा लोग शामिल किए गए। लेकिन भाजपा ने उसमें आरके सिंह को जगह नहीं दी। इसके बाद भाजपा ने घोषणापत्र तैयार करने वाली समिति बनाई लेकिन उसमें भी आरके सिंह को जगह नहीं मिली। हालांकि इस बीच यह अलग चर्चा का विषय है कि...

  • नीतीश के मंत्रियों के झगड़े

    बिहार में एक समय था, जब कैबिनेट की बैठक में या कैबिनेट के बाहर भी किसी मंत्री की हिम्मत नहीं होती थी किसी भी मसले पर बयान देने की। अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद हैं तो बिना उनकी अनुमति के कोई भी व्यक्ति जुबान नहीं खोल सकता था, चाहे वह भाजपा का मंत्री हो या राजद का हो या जनता दल यू का हो। लेकिन अब स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में उनके मंत्री लड़ने लगते हैं और उनके बीच मारपीट की नौबत आ जाती है। पार्टी के अंदर गुटबाजी इतनी बढ़ गई है कि नेता और मंत्री...

  • पप्पू व कन्हैया से कौन डरता है?

    यह लाख टके का सवाल है कि आखिर बिहार में कांग्रेस और राजद के अंदर कौन लोग हैं, जिनको पप्पू यादव और कन्हैया कुमार से डर लगता है? बुधवार को पटना की सड़कों पर विपक्षी गठबंधन ने प्रदर्शन किया। प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में ट्रेनें रोकी गईं और सड़कों पर परिवहन को रोका गया। पटना में सबसे ज्यादा भीड़ जुटाई पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने। उन्होंने प्रदर्शन के पूरे रास्ते को कांग्रेस के झंडे से पाट दिया। राजद के लोग भी हैरान थे कि इतने कांग्रेसी कहां से आ गए, जो झंडा लेकर पटना की सड़कों पर...

  • बिहार का सीएम समय तय करेगा

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले दो महीने में तीन बार बिहार के दौरे पर गए। पहलगाम कांड के दो दिन बाद 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री मधुबनी पहुंचे थे और पिछले महीने 27 मई को वे औरंगाबाद के बिक्रमगंज पहुंचे। इसके बाद 20 जून को उन्होंने सीवान में कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया और एक जनसभा को संबोधित किया। तीनों सभाओं में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद रहे। उन्होंने तीनों सभाओं में कम से कम 10-10 बार प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया, अभिनंदन किया और सभा में मौजूद लोगों से प्रधानमंत्री को नमन कराया। लेकिन नीतीश और जनता दल...

  • लालू, तेजस्वी से राहुल की होड़

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी बिहार यात्रा के रिकॉर्ड बना रहे हैं। चुनाव से पहले संभवतः किसी राज्य में राहुल की इतनी यात्राएं नहीं हुई होंगी। वे इस साल पांच बार बिहार की यात्रा कर चुके हैं। उनकी कम से कम चार यात्राओं का मकसद दलित और पिछड़ों के साथ संवाद रहा। हर यात्रा में वे कई कई कार्यक्रम कर रहे हैं। आजादी की लड़ाई के भूले बिसरे नायक जगलाल चौधरी की जयंती में राहुल पहुंचे तो पहाड़ काट कर सड़क बनाने वाले माउंटेन मैन के नाम से मशहूर दशरथ मांझी के घर भी गए। अपनी एक यात्रा में वे अंबेडकर...

  • प्रशांत किशोर क्या चिराग की पोल खोलेंगे?

    यह लाख टके का सवाल है कि क्या चिराग पासवान की गाहे बगाहे तारीफ करने वाले प्रशांत किशोर अब उनकी पोल खोलेंगे? जनता दल यू के नेता और बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने एक बयान को लेकर प्रशांत किशोर के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। असल में प्रशांत किशोर ने एक कार्यक्रम में कह दिया कि अशोक चौधरी ने टिकट खरीद कर अपनी बेटी को सांसद बनाया है। गौरतलब है कि अशोक चौधरी खुद जनता दल यू में हैं लेकिन उनकी बेटी चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ कर जीती हैं।...

  • बिहार में एनडीए में खटराग शुरू

    बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। चुनाव आयोग की टीम अपनी तैयारियां कर रही हैं तो पार्टियों की अलग तैयारी चल रही है। इस बीच प्रदेश के सत्तारूढ़ गठबंधन यानी  एनडीए के अंदर खटराग शुरू हो गया है। कह सकते हैं कि किसी गठबंधन में पांच पार्टियां हैं तो उनमें खींचतान होना स्वाभाविक है। लेकिन जहां भाजपा ने 45 विधायक वाले नेता को मुख्यमंत्री बनाया हो, दो छोटी पार्टियों के नेताओं को केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाया हो और तीसरी छोटी पार्टी के नेता को लोकसभा चुनाव हारने के बाद राज्यसभा भेजा हो, वहां भला क्यों...

  • विपक्षी गठबंधन में कांग्रेस का पेंच

    ऐसा नहीं है कि बिहार में सिर्फ एनडीए के अंदर ही खटराग है, विपक्षी गठबंधन में भी शह मात का खेल चल रहा है। कांग्रेस पार्टी ने अभी तक अकेले चलने का स्टैंड लिया हुआ है। राहुल गांधी एक बार फिर बिहार के दौरे पर जा रहे हैं और इस बार भी उनका कार्यक्रम अकेले होगा। यानी उसमें राष्ट्रीय जनता दल, विकासशील इंसान पार्टी और तीन वामपंथी पार्टियों की कोई भागीदारी नहीं होगी। राहुल इस बार नीतीश कुमार के गृह जिले में यानी नालंदा जा रहे हैं। वहां वे अति पिछड़ी जातियों के सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इससे पहले वे...

  • चिराग व मांझी के सारे पद परिवार में ही

    भारतीय जनता पार्टी ने कमाल किया है। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले उसने परिवारवाद का ऐसा खेल खेला है, जैसा इससे पहले उसने अपनी किसी सहयोगी पार्टी के साथ नहीं किया होगा। प्रादेशिक पार्टियों के नेता ऐसा करते रहे हैं। मुलायम सिंह य़ादव ने अपने परिवार और विस्तारित परिवार के एक दर्जन लोगों को सांसद, विधायक या कुछ और बनाया था। शरद पवार और करुणानिधि के परिवार में भी ऐसा है। लेकिन भाजपा ने अपनी तरफ से किसी सहयोगी पार्टी के लिए ऐसी उदारता नहीं दिखाई थी। बिहार में भाजपा ने अपनी दो सहयोगी पार्टियों लोक जनशक्ति पार्टी और...

  • ज्यादा सीट पर अड़ेगी नीतीश की पार्टी

    उम्मीद की जा रही थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन के लिए बिहार जा रहे हैं तो वे एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार को लेकर बना सस्पेंस दूर करेंगे। लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। मोदी ने यात्रा के पहले दिन यानी गुरुवार को अपनी पार्टी की कोर कमेटी के नेताओं के साथ लंबी बैठक हुई। पटना के वीरचंद पटेल मार्ग पर स्थित पार्टी कार्यालय में उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी, संगठन मंत्री, बिहार व झारखंड के संघ के प्रभारी और दोनों उप मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री ने बैठक की। बताया जा रहा है कि...

  • बिहार में विपक्ष की बढ़ती चुनौतियां

    बिहार विधानसभा चुनाव के चुनाव से पहले राजद के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की चुनौतियां बढ़ रही हैं और साथ साथ विपक्षी महागठबंधन की चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। बिहार चुनाव से पहले जितने असामान्य घटनाक्रम हो रहे हैं उन सबसे से किसी न किसी तरह की नई चुनौती विपक्ष के सामने आ रही है। अगर चुनाव सामान्य होता, तो विपक्ष और तेजस्वी यादव के लिए बहुत अच्छी संभावना दिख रही थी। नेतृत्व बदलाव के लिहाज से संक्रमण के दौर से गुजर रहे बिहार में तेजस्वी को नीतीश कुमार के स्वाभाविक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा...

  • एमआईएम की गठबंधन की बेचैनी

    असदुद्दीन ओवैसी अब तक अलग थलग मुस्लिम राजनीति करते रहे थे। लेकिन पहलगाम कांड और उसके बाद हुई सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके बयान, भाषण और उनकी राजनीति ने देश के बहुसंख्यकों का भी मन मोह लिया है। अब सोशल मीडिया में राइट विंग की तरफ से उनको गालियां नहीं पड़ती हैं, बल्कि यह कहा जाता है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत को मिल जाए तो वहां असदुद्दीन ओवैसी को मुख्यमंत्री बनाया जाए। वे अभी भारत सरकार का संदेश लेकर दुनिया के दौरे पर गए हैं। इस बीच खबर है कि उनकी पार्टी बिहार में तालमेल...

और लोड करें