बिहार में राज्यसभा की एक सीट को लेकर चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी के बीच खींचतान चल रही है। उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा सांसद हैं। लोकसभा का चुनाव हारने के बाद पिछले साल उनको राज्यसभा भेजा गया था। उनका कहना है कि उनसे कमिटमेंट है। पिछली बार उनको चार साल की बजाय दो साल वाली राज्यसभा दी गई थी और कहा गया था कि 2026 में उनको फिर भेजा जाएगा। हालांकि उनकी पत्नी विधायक हो गई हैं और उन्होंने अपने बेटे को बिना विधायक बने ही मंत्री बना दिया है। इसका मतलब है कि उनको एक विधान परिषद की सीट मिल रही है। इससे उनकी राज्यसभा की संभावना कम हुई है।
दूसरी ओर जीतन राम मांझी कह रहे हैं कि उनके बेटे और बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन से अमित शाह ने वादा किया था कि एक राज्यसभा सीट देंगे। इन तीनों में सबसे मजबूत दावेदारी चिराग पासवान की है, जिनकी पार्टी के 19 विधायक हैं। भाजपा के 89 और जनता दल यू के 85 विधायक हैं। दोनों को अपने दम पर राज्यसभा की दो दो सीटें मिल जाएंगी। इसके बाद 19 सीट वाले चिराग पासवान को एक सीट चाहिए। कहा जा रहा है कि वे अब्दुल खालिक को राज्यसभा भेजना चाहते हें। पहले उनकी मां रीना पासवान का नाम भी चर्चा में था। लेकिन अपने पिता के साथी रहे खालिद का नाम आगे करके उन्होंने एक दांव चलने का फैसला किया है। अगर प्रेम गुप्ता बनाम अब्दुल खालिक का मुकाबला होता है तो ओवैसी के विधायकों के लिए आसान नहीं होगा कि वे खालिक को वोट न दें। लेकिन तब उपेंद्र कुशवाहा और मांझी के विधायक क्या करेंगे यह देखने वाली बात होगी। अगर पांचवां उम्मीदवार भाजपा का होता तो कोई दिक्कत नहीं होती। लेकिन चिराग के उम्मीदवार को समस्या हो सकती है। जो हो इस बार राज्यसभा के दोवार्षिक चुनाव में बिहार का चुनाव सबसे दिलचस्प होगा।


