भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी अपने पूर्ववर्ती जेपी नड्डा की तरह लंबे समय तक अध्यक्ष रहने वाले हैं। ध्यान रहे नड्डा को 2019 के जून में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था और उसके बाद जनवरी 2020 में उनको पूर्णकालिक अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनका कार्यकाल जनवरी 2023 तक था। भाजपा के संविधान के मुताबिक कोई भी व्यक्ति लगातार दो बार अध्यक्ष रह सकता है। इस लिहाज से अगर भाजपा के दोनों शीर्ष नेता चाहते तो नड्डा को तीन साल का एक और कार्यकाल दे सकते थे। अगर उनको दूसरा कार्यकाल नहीं देना था तो नए अध्यक्ष का चुनाव हो सकता था। यह भी ध्यान रखने की बात है कि जनवरी 2023 के आसपास कोई बड़ा चुनाव नहीं था। मई में सिर्फ कर्नाटक का चुनाव होना था, जहां नड्डा की कोई खास भूमिका नहीं थी। कर्नाटक के रहने वाले बीएल संतोष उनकी टीम में संगठन महामंत्री थे, उनकी भूमिका थी, बीएस येदियुरप्पा की भूमिका थी और नरेंद्र मोदी व अमित शाह का रोल था। लेकिन जनवरी 2023 में जेपी नड्डा को विस्तार दिया गया। उसके बाद तो वे तीन साल तक सेवा विस्तार पर चले। आधिकारिक रूप से बिना दूसरा कार्यकाल हासिल किए वे तीन साल और अध्यक्ष रहे।
नितिन नबीन के लिए स्थितियां अलग हैं। उनका तीन साल का कार्यकाल जनवरी 2029 में पूरा होगा और उस समय लोकसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी होगी। दो तीन महीने में चुनाव की अधिसूचना जारी होने वाली होगी। जाहिर है ऐसे समय में राष्ट्रीय अध्यक्ष को नहीं बदला जाएगा। जून में राष्ट्रीय चुनाव खत्म होंगे तो तीन बड़े राज्यों महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड की चुनाव प्रक्रिया शुरू होने वाली होगी। ध्यान रहे नितिन नबीन बिहार के हैं तो झारखंड के चुनाव के लिहाज से भी उनकी कुछ उपयोगिता बनती है। सो, दिसंबर 2029 तक ये चुनाव निपटेंगे। इसके बाद जनवरी 2030 में दिल्ली का चुनाव है, जिसमें सबको पता है कि बिहारी वोट कितने अहम होते हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद साल के अंत में बिहार विधानसभा का चुनाव होगा।
जाहिर है अगर भारतीय जनता पार्टी ने किसी बिहारी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है तो उसका लाभ बिहार में लेने की कोशिश जरूर करेगी। यह इतिहास है कि आजादी के बाद से आज तक किसी भी राष्ट्रीय पार्टी ने बिहार के किसी नेता को अपना अध्यक्ष नहीं बनाया था। सोचें, बिहार के लोग राजनीतिक रूप से बड़े सजग और समझदार माने जाते हैं लेकिन कोई पार्टी उनको न तो राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाती है, न प्रधानमंत्री बनाती है, न गृह मंत्री बनाती है। गलती से एकाध लोग रक्षा, वित्त या विदेश मंत्री बन गए। बहरहाल, नवंबर 2030 में बिहार विधानसभा का चुनाव होने वाला है। सो, उस समय तक नितिन नबीन का अध्यक्ष रहना एक तरह से तय दिख रहा है। अगर कोई अप्रत्याशित स्थितियां नहीं बनती हैं तो वे अध्यक्ष रहेंगे। अप्रत्याशित स्थिति का मतलब है कि अगले तीन साल में 16 राज्यों के विधानसभा चुनाव होने हैं उनमें भाजपा का प्रदर्शन बहुत खराब हो जाए तो फिर तीन साल के बाद कार्यकाल मिलना मुश्किल होगा।


