bihar politics

  • बिहार में कांग्रेस की मुश्किल

    बिहार में कांग्रेस पार्टी के छह विधायक जीते थे। चुनाव नतीजों के कुछ दिन बाद राहुल गांधी ने सभी विधायकों को दिल्ली बुला कर एक बैठक की थी और कहा गया था कि जल्दी ही विधायक दल का नेता चुना जाएगा। लेकिन पांच महीने बाद भी कांग्रेस ने विधायक दल का नेता नहीं चुना है। जानकार सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेता चुनेगी भी नहीं क्योंकि कांग्रेस के दिल्ली में बैठे नेताओं को पता है कि उसका विधायक दल ही नहीं रहने वाला है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के सभी छह विधायक पाला बदल सकते हैं। इसलिए...

  • बिहार को प्रयोगशाला बना दिया

    बिहार राजनीति की प्रयोगशाला बना हुआ है। पांच महीने पहले नीतीश कुमार 80 फीसदी से ज्यादा सीटें जीत कर एनडीए के मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन उनको अभी हटाना है क्योंकि उनकी सेहत ठीक नहीं है। हालांकि यह कहा नहीं गया कि सेहत खराब होने और वह भी मानसिक सेहत की वजह से उनको हटाया जा रहा है। कहा गया कि वे राज्यसभा जाना चाहते थे इसलिए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। देश के किसी व्यक्ति ने इस बताए गए कारण पर यकीन नहीं किया। उन्होंने राज्यसभा का नामांकन दाखिल किया और चुन भी लिए गए। जब वे एक साथ दो...

  • बिहार में निशांत की मान मनौव्वल

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत का नाटक खत्म ही नहीं हो रहा है। जब से नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने और दिल्ली जाने की चर्चा शुरू हुई तभी से इस बात की भी चर्चा हो रही है कि निशांत राजनीति में आने या कोई पद संभालने को तैयार नहीं हैं। बड़ी मुश्किल से उनको पार्टी में शामिल कराया गया। इसके बाद उनकी यात्रा का कार्यक्रम बना। कहा गया कि वे भाजपा के नेतृत्व में बनने वाली सरकार में उप मुख्यमंत्री बनेंगे। यह सब कुछ तय हो जाने की खबर आने के बाद कभी यह चर्चा शुरू...

  • नीतीश कब छोड़ेंगे सीएम की कुर्सी?

    यह सस्पेंस खत्म नहीं हो रहा है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कब  इस्तीफा देंगे। उनको दो इस्तीफे देने हैं। पहला तो विधान परिषद से और दूसरा मुख्यमंत्री पद से। गौरतलब है कि नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए चुन लिए गए और पहले से विधान परिषद के सदस्य हैं। सो, 16 मार्च से 14 दिन के अंदर उनको किसी एक सदन से इस्तीफा देना है। उनके राज्यसभा के लिए चुने जाने के 10 दिन हो गए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी उनके साथ ही राज्यसभा के लिए चुने गए थे। वे पहले से...

  • बिहार में कांग्रेस और राजद की चिंता

    राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के मुस्लिम विधायक फैसल रहमान ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि उनकी मां की तबियत खराब थी, जिसकी वजह से वे दिल्ली में थे। हालांकि राजद उम्मीदवार अमरेंद्रधारी सिंह के लिए चुनाव प्रबंधन संभाल रहे फैसल अली ने कहा कि फैसल रहमान 15 मार्च की रात तक पटना में थे लेकिन 16 मार्च की सुबह वोट डालने नहीं गए। कहा जा रहा है कि किसी पुराने मर्डर केस की वजह से उनकी नस दबी हुई थी। इसी तरह कांग्रेस के तीन विधायकों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। गौरतलब है कि...

  • नीतीश के हाथ में अब कुछ भी नहीं

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को पार्टी के विधायकों, सांसदों की बैठक बुलाई तो उसमें कहा कि सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा और वे दिल्ली से पार्टी के कामकाज पर नजर रखेंगे। उनसे ज्यादा उनके साथ वाले नेताओं ने भरोसा दिलाने की कोशिश की। लेकिन हकीकत यह है कि नीतीश कुमार के हाथ में अब कुछ भी नहीं है। उनको मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए भाजपा ने पिछले 12 साल से जो अभियान चला रहा था उसमें कामयाब होने के बाद भाजपा ने यह भी सुनिश्चित किया है कि नीतीश की मोलभाव की क्षमता को भी...

  • नीतीश के उत्तराधिकार की योजना तैयार है

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 75 साल के हो गए हैं। उनकी सेहत की जो स्थिति है वह उम्र की वजह से दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। उसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है। इसलिए उनकी पार्टी भी और साथ साथ भाजपा भी उनके उत्तराधिकार की योजना पर काम कर रही है। जानकार सूत्रों का कहना है कि इस बार राज्यसभा चुनाव के बीच ही नीतीश कुमार के उत्तराधिकार की योजना पर गंभीरता से काम हुई। तभी उनके बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लाकर राज्यसभा भेजने की योजना पर बात हुई। अगर वे राज्यसभा जाते हैं तो...

  • बिहार में भाजपा का एजेंडा चल रहा है

    बिहार में भले नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं और जनता दल यू गठबंधन का नेतृत्व करने वाली पार्टी है लेकिन सरकार में सिर्फ भाजपा का एजेंडा चल रहा है। जनता दल यू की ओर से कोई नेता ऐसा नहीं है, जो इसका विरोध कर सके। ऐसी बातें हो रही हैं, जैसी बिहार में कभी नहीं हुईं। यहां तक कि भाजपा के नेता भी पहले जो बातें कहने की हिम्मत नहीं करते थे वैसी बातें कही जा रही हैं। जाहिर है कि भाजपा के नेता अब सरकार को अपनी मानने लगे हैं और उनको पता है कि नीतीश कुमार को कोई सुध...

  • निशांत को लाने के पीछे बड़ी राजनीति

    नीतीश कुमार क्यों अपने बेटे को राजनीति में लाने से हिचक रहे हैं? सरस्वती पूजा के दिन 23 जनवरी को सबने देखा कि उनकी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह नीतीश को मना रहे थे कि वे बेटे को राजनीति में आने दें। नीतीश की हिचक का एक कारण तो यह है कि वे अपने को कर्पूरी ठाकुर का शिष्य मानते हैं और उनके मन में यह बात बैठी है कि अपने सक्रिय रहते बेटे को राजनीति में नहीं लाना है। तभी माना जा रहा है कि पार्टी का जो खेमा निशांत की...

  • बिहार कांग्रेस के प्रभारी और अध्यक्ष से नाराजगी

    जिस समय भारतीय जनता पार्टी का संगठन पर्व चल रहा था यानी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो रहा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नितिन नबीन को कुर्सी पर बैठाया, उनके पीछे खड़े हुए और उससे पहले कहा कि नितिन नबीन उनके भी बॉस हैं और पूरी पार्टी नितिन नबीन के नाम के नारे लगा रही थी। उसी समय राहुल गांधी द्वारा नियुक्त किए गए बिहार के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू पटना पहुंचे। पटना हवाईअड्डे पर उनको रिसीव करने के लिए सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम पहुंचे थे। राजेश राम के साथ भी कोई व्यक्ति नहीं था। कांग्रेस का एक भी...

  • भाजपा, जदयू में शह मात का खेल

    बिहार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यू के बीच शह मात का खेल चल रहा है। भाजपा इंतजार में बैठी है कि नीतीश कुमार सेहत के हवाले रिटायर हों तो भाजपा का सीएम बने और दूसरी ओर नीतीश कुमार कड़ाके की ठंड में समृद्धि यात्रा पर निकल गए। वे पूरे प्रदेश की यात्रा करेंगे। भाजपा का इंतजार लंबा होता जा रहा है। इस बीच जनता दल यू के नेताओं ने अपने विधायकों की संख्या बढ़ा कर सबसे बड़ी पार्टी बनने का दांव खेलने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि भाजपा नेता इस गेम से परिचित हैं इसलिए...

  • चिराग, कुशवाहा और मांझी की खींचतान

    बिहार में राज्यसभा की एक सीट को लेकर चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी के बीच खींचतान चल रही है। उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा सांसद हैं। लोकसभा का चुनाव हारने के बाद पिछले साल उनको राज्यसभा भेजा गया था। उनका कहना है कि उनसे कमिटमेंट है। पिछली बार उनको चार साल की बजाय दो साल वाली राज्यसभा दी गई थी और कहा गया था कि 2026 में उनको फिर भेजा जाएगा। हालांकि उनकी पत्नी विधायक हो गई हैं और उन्होंने अपने बेटे को बिना विधायक बने ही मंत्री बना दिया है। इसका मतलब है कि उनको एक विधान परिषद...

  • जदयू ने भाजपा की लाइन नहीं पकड़ी

    संसद में वंदे मातरम पर हुई चर्चा में भाजपा के साथ साथ उसकी लगभग सभी सहयोगी पार्टियों ने उसके हिसाब से भाषण दिया। सांसदों की संख्या के लिहाज से तीन सबसे बड़ी सहयोगी पार्टियों में से तेलुगू देशम पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास ने भी भाजपा के हिसाब से भाषण दिया लेकिन जनता दल यू ने अलग लाइन ली। जदयू ने यह नहीं कहा कि कांग्रेस पार्टी ने वंदे मातरम के चार अंतरे हटाए और उसने जिन्ना या मुस्लिम लीग के आगे सरेंडर किया। भाजपा की कोशिश इसी राजनीतिक लाइन को स्थापित करने की थी। जनता दल यू की...

  • गोली की रफ्तार से हुआ सुजीत सिंह का काम

    बिहार में इस बार विधायक बने सुजीत सिंह मंत्री नहीं बन पाए हैं। इससे अनेक लोगों में निराशा हुई है। एक बड़ा समूह चाहता था कि भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी रहे सुजीत सिंह को कोई अहम मंत्रालय मिले। वे भले पहली बार के विधायक हैं लेकिन प्रशासनिक अनुभव बहुत बड़ा है। बहरहाल, वे मंत्री नहीं बने लेकिन उनके विधायक बनने की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। सरकारी सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से लेकर विधायक बनने तक का काम गोली की रफ्तार से हुआ। वैसे उनकी पत्नी स्वर्णा सिंह पहले से जिस सीट से विधायक थीं वे वहीं से...

  • भाजपा-जदयू में बड़ा बनने की होड़

    यह कमाल की बात है, जिसे बिहार के सत्तारूढ़ गठबंधन की दोनों बड़ी पार्टियां यानी भाजपा और जदयू के नेता स्वीकार नहीं कर रहे हैं लेकिन यह हकीकत है कि दोनों में बड़ा बनने की होड़ है, जो पहले दिन से शुरू हो गई है। विधायकों की संख्या के लिहाज से भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। उसे जदयू से चार सीटें ज्यादा मिली हैं। इस आंकड़े के आधार पर चुनाव के बाद से यह खबर खूब चली कि भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाएगी। इसके बाद यह भी अफवाह यहां वहां फैलाई गई कि भाजपा और जनता दल यू में ढाई-ढाई साल...

  • तेजस्वी को किस बात की जल्दी थी?

    तेजस्वी यादव को किस बात की जल्दी थी? यह लाख टके का सवाल है। उन्होंने चुनाव नतीजों के तीन दिन बाद ही समीक्षा बैठक बुलाई और उसके साथ ही विधायक दल की बैठक करा कर नेता भी चुन लिए गए। तत्काल पार्टी की ओर से कह दिया गया कि चूंकि राजद के 25 विधायक हैं इसलिए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पद पर पार्टी का दावा बनता है। राजद की ओर से विधायक दल की बैठक में तेजस्वी को नेता चुने जाने के बाद कहा गया कि विधानसभा गठित होने की स्पीकर का चुनाव हो जाने के बाद पार्टी तेजस्वी के...

  • बिहार में भाजपा के लिए रास्ता

    बिहार में पहली बार विधायकों की संख्या के लिहाज से भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनी है। यह लंबे प्रयासों और दीर्घकालिक राजनीति का परिणाम है। जिस समय भाजपा बिहार विधानसभा में अच्छे खासे अंतर से दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनती थी तब भी वह तीसरे नंबर की पार्टी के नेता नीतीश कुमार का चेहरा आगे करके राजनीति करती थी। भाजपा के उस समय के प्रदेश और देश के नेताओं को अंदाजा था कि मंडल की राजनीति साधने के लिए उनको एक ऐसे चेहरे की जरुरत है। अब वह जरुरत क्रमशः कम होती जा रही है। इसके कई कारण...

  • आरके सिंह को भाजपा ने कोई जगह नहीं दी

    पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और नरेंद्र मोदी की सरकार में दो बार मंत्री रहे आरके सिंह बागी तेवर दिखा कर भाजपा को झुका लेने की सोच रहे हैं लेकिन भाजपा ने उनको कोई जगह नहीं दी है। उनके बगावती तेवर के बाद भाजपा ने बिहार के लिए चुनाव अभियान समिति का गठन किया, जिसमें 40 से ज्यादा लोग शामिल किए गए। लेकिन भाजपा ने उसमें आरके सिंह को जगह नहीं दी। इसके बाद भाजपा ने घोषणापत्र तैयार करने वाली समिति बनाई लेकिन उसमें भी आरके सिंह को जगह नहीं मिली। हालांकि इस बीच यह अलग चर्चा का विषय है कि...

  • नीतीश के मंत्रियों के झगड़े

    बिहार में एक समय था, जब कैबिनेट की बैठक में या कैबिनेट के बाहर भी किसी मंत्री की हिम्मत नहीं होती थी किसी भी मसले पर बयान देने की। अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद हैं तो बिना उनकी अनुमति के कोई भी व्यक्ति जुबान नहीं खोल सकता था, चाहे वह भाजपा का मंत्री हो या राजद का हो या जनता दल यू का हो। लेकिन अब स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में उनके मंत्री लड़ने लगते हैं और उनके बीच मारपीट की नौबत आ जाती है। पार्टी के अंदर गुटबाजी इतनी बढ़ गई है कि नेता और मंत्री...

  • पप्पू व कन्हैया से कौन डरता है?

    यह लाख टके का सवाल है कि आखिर बिहार में कांग्रेस और राजद के अंदर कौन लोग हैं, जिनको पप्पू यादव और कन्हैया कुमार से डर लगता है? बुधवार को पटना की सड़कों पर विपक्षी गठबंधन ने प्रदर्शन किया। प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में ट्रेनें रोकी गईं और सड़कों पर परिवहन को रोका गया। पटना में सबसे ज्यादा भीड़ जुटाई पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने। उन्होंने प्रदर्शन के पूरे रास्ते को कांग्रेस के झंडे से पाट दिया। राजद के लोग भी हैरान थे कि इतने कांग्रेसी कहां से आ गए, जो झंडा लेकर पटना की सड़कों पर...

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