राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की मुश्किलें बढ़ रही हैं। उनकी पार्टी के तीन विधायक उनसे नाराज हैं और उनसे दूरी बना रहे है। पिछले दिनों कुशवाहा ने एक पार्टी रखी थी, जिसमें ये तीनों विधायक शामिल नहीं हुए। बाद में इन तीनों ने कहा कि जब दिल ही नहीं मिल रहा है या बात ही नहीं हो रही है तो भात खाने कौन जाएगा। हालांकि तीनों ने यह कहा कि वे पार्टी में बने हुए हैं। गौरतलब है कि कुशवाहा की पार्टी के चार विधायक जीते थे, जिसमें एक उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा हैं। उन्होंने अपने बेटे को विधायक बने बगैर ही मंत्री बनवा दिया है और भाजपा की ओर से मिल रही एमएलसी की एक सीट उनके लिए आरक्षित कर दी है। कहा जा रहा है कि तीनों विधायक इसकी वजह से ज्यादा नाराज हुए हैं। वे उनकी पत्नी को मंत्री के तौर पर स्वीकार करने को तैयार थे लेकिन बेटे के नाम पर भड़क गए।
लेकिन यह मामला इतना सरल नहीं है। यह सही है कि उपेंद्र कुशवाहा ने बेटे को मंत्री बनाया तो तीनों विधायक नाराज हुए। लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि तीनों को पार्टी की टिकट सिर्फ मेरिट पर नहीं मिली थी। उसके दूसरे कारण भी थे और ऐसी स्थिति में कोई भी नेता निष्ठा की उम्मीद नहीं कर सकता है। इसके अलावा एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि भाजपा और जनता दल यू की शह इन तीनों विधायकों को मिली हुई है। जानकार सूत्रों का कहना है कि जनता दल यू की ओर से तीनों को पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया गया है। हालांकि भाजपा ऐसा नहीं होने देना चाहती है। लेकिन भाजपा की शह भी इन विघायकों को इसलिए मिल रही होगी क्योंकि भाजपा भी कुशवाहा को सीट नहीं देना चाहती है। उनकी पत्नी विघायक हैं और बेटा मंत्री है तो उनको राज्यसभा हो सकता है कि नहीं दिया जाए। तीन विधायकों के जरिए उन पर इसका दबाव होगा कि वे राज्यसभा की दावेदारी छोड़ दें। अगर वे राज्यसभा के लिए अड़ते हैं और नहीं मिलने पर एनडीए से अलग होने की धमकी वगैरह देते हैं तो उनकी पार्टी के तीनों विधायक अलग हो जाएंगे। सो, इस समय कुशवाहा की स्थिति सांप छुछुंदर वाली हो गई है।
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