यह सवाल पटना से लेकर दिल्ली तक इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए भाजपा ने उम्मीदवार बदल कर जिस नए उम्मीदवार के नाम का ऐलान किया उसको बधाई देने में नितिन नबीन को 22 घंटे लग गए। इससे पहले पार्टी ने अभिषेक सिन्हा उर्फ बंटी को उम्मीदवार बनाया था। उनके नाम की घोषणा होते ही नितिन नबीन ने उनको बधाई दी। लेकिन विवाद की वजह से जब अभिषेक की टिकट कटी तो उनकी जगह नीरज कुमार सिन्हा के नाम का ऐलान किया गया। नीरज सिन्हा के नाम की घोषणा शुक्रवार को शाम चार बजे के आसपास हुई थी। लेकिन अगले दिन यानी शनिवार को दो बजे के करीब नितिन नबीन ने उनको बधाई दी। तभी से यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि नितिन नबीन को इतना समय लगा। पार्टी की अंदरूनी कलह खुल कर सामने आ गई है।
असल में नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाना नितिन नबीन को पसंद नहीं है। कहा जा रहा है कि यह नाम तय करने में उनकी सहमति नहीं ली गई, जबकि बांकीपुर उनकी पारंपरिक सीट है, जहां से पहले चार बार उनके पिता और फिर पांच बार वे खुद चुनाव जीते। जानकार सूत्रों का कहना है कि पहले पार्टी नेतृत्व ने उनको ही उम्मीदवार चुनने को कहा था। तभी उन्होंने अभिषेक को उम्मीदवार बनाया। लेकिन बाद में पता चला कि अभिषेक को माता और पिता दोनों को चारा घोटाले में सजा हो चुकी है। इसके अलावा भी कुछ बातें थीं, जो अभी बाद में सामने आएंगी। तभी पार्टी आलाकमान ने नया उम्मीदवार तय करने में उनकी राय नहीं ली। अभिषेक के नाम वापस लेने के बाद से उनके पिता भी रविंद्र सिन्हा काफी नाराज हैं और वे भाजपा के प्रदेश नेताओं के ऊपर हमला कर रहे हैं। उन्होंने साजिश किए जाने का आरोप लगाया है। अपने बेटे के साथ साथ वे नितिन नबीन के खिलाफ भी साजिश के आरोप लगे रहे हैं।
