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नीतीश के हाथ में अब कुछ भी नहीं

Patna, Sep 05 (ANI): Bihar CM Nitish Kumar addresses the gathering during a public meeting at Punpun, in Patna on Friday. (ANI Photo)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को पार्टी के विधायकों, सांसदों की बैठक बुलाई तो उसमें कहा कि सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा और वे दिल्ली से पार्टी के कामकाज पर नजर रखेंगे। उनसे ज्यादा उनके साथ वाले नेताओं ने भरोसा दिलाने की कोशिश की। लेकिन हकीकत यह है कि नीतीश कुमार के हाथ में अब कुछ भी नहीं है। उनको मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए भाजपा ने पिछले 12 साल से जो अभियान चला रहा था उसमें कामयाब होने के बाद भाजपा ने यह भी सुनिश्चित किया है कि नीतीश की मोलभाव की क्षमता को भी जीरो कर दिया जाए। तभी भाजपा ने सत्ता में साझीदारी के पुराने फॉर्मूले को मानने से इनकार कर दिया है। जानकार सूत्रों का कहना है कि जिस मॉडल पर नीतीश की सरकार बनी थी उस मॉडल पर भाजपा की सरकार नहीं बनेगी। कम से कम दो मामलों में भाजपा ने इसे साफ कर दिया है।

पहला मामला स्पीकर का है। नीतीश कुमार की पार्टी की ओर से कहा गया कि भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा तो स्पीकर जनता दल यू का होगा। बताया जा रहा है कि भाजपा ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ध्यान रहे इससे पहले नीतीश कुमार की पिछली दो सरकारों में इसी फॉर्मूले पर भाजपा का स्पीकर बनता था। पहले विजय सिन्हा बने, जो अभी उप मुख्यमंत्री हैं, फिर नंदकिशोर यादव स्पीकर हुए, जिनको अभी नगालैंड का राज्यपाल बनाया गया है। इसके बाद 2024 में भाजपा की सरकार बनी तो प्रेम कुमार स्पीकर बने। लेकिन अब भाजपा ने साफ कर दिया है कि सीएम भी उसी का होगा और स्र्पीकर भी उसी का होगा। भाजपा ने बड़ी कृपा दिखाते हुए कहा कि विधान परिषद में नीतीश की पार्टी का सभापति बनाया जा सकता है। हालांकि अब नीतीश की मानसिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे कोई खेल कर सकें और उनके सभी करीबी नेता भाजपा के साथ ही हैं फिर भी भाजपा जोखिम नहीं ले रही है। आखिर नीतीश की पार्टी के 85 विधायक हैं।

दूसरा मुद्दा गृह मंत्रालय का है। पिछले साल सरकार बनी और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हुए तो भाजपा ने गृह मंत्रालय पर दावा कर दिया। इससे पहले गृह मंत्रालय हमेशा मुख्यमंत्री के पास रहता था। लेकिन इस बार भाजपा ने यह मंत्रालय अपने पास रखा। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को गृह विभाग का जिम्मा मिला। इसी फॉर्मूले पर नीतीश की पार्टी गृह मंत्रालय की मांग कर रही है। लेकिन भाजपा ने इनकार कर दिया है। बिहार में कानून व्यवस्था को बहुत अच्छा करने के अपने एजेंडे का हवाला देकर भाजपा ने कहा है कि गृह मंत्रालय उसके पास ही रहेगा। इसके अलावा भाजपा वित्त भी मागेंगे लेकिन हो सकता है कि उस पर समझौता कर लिया जाए।

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