अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा अकेले लड़ने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को पंजाब के दौरे पर गए और चंडीगढ़ से लेकर जालंधर तो राजनीति हुई उससे यह बात और साफ हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी रविदास समाज के डेरा सचखंड बलां के प्रमुख निरंजन दास से भी मिले। पिछले साल केंद्र सरकार ने उनको पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। गौरतलब है कि पंजाब में करीब 33 फीसदी दलित आबादी है। इसमें बड़ा हिस्सा रविदास समुदाय का है। उनकी राजनीतिक मजहबी दलितों से अलग होती है। वाल्मिकी भी अच्छी खासी संख्या में हैं। भाजपा इस बार इनके वोट में अच्छा खासा हिस्सा हासिल करने की उम्मीद कर रही है।
ध्यान रहे पंजाब में 38 फीसदी के करीब हिंदू आबादी है और करीब 55 सीटों पर हिंदू मतदाताओं का अच्छा असर है। बताया जा रहा है कि भाजपा इन सीटों पर फोकस करके चुनाव लड़ेगी। कहने को तो भाजपा ने भी प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों को बनाया है, जो जाट सिख समुदाय से आते हैं लेकिन सबको पता है कि भाजपा की राजनीति हिंदू वोटों को होती है। भाजपा जैसे ही कांग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरे जाट सिख समुदाय के हैं। वारिस पंजाब दे नाम से जो नई पार्टी बनी है उसका भी आधार जाट सिख ही हैं। जाट सिख समुदाय 22 फीसदी के करीब आबादी वाला है लेकिन मालवा क्षेत्र की 69 सीटों पर अच्छा खासा असर रखता है। भाजपा को पता है कि चार पार्टियों के बीच जाट सिख वोट बंटता है तो 38 फीसदी हिंदू आबादी ही भाजपा को सबसे बड़ी या दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बना सकती है। इसलिए वह अपने एजेंडे पर अकेले चुनाव लड़ेगी। उसे लग रहा है कि इस बार त्रिशंकु विधानसभा में उसकी बड़ी भूमिका हो सकती है।
