भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने साफ कर दिया है कि पंजाब में उनकी पार्टी अकेले लड़ेगी। कुछ दिन पहले चर्चा चल रही थी कि भाजपा और अकाली दल मिल कर लड़ेंगे। हालांकि अब भी अंतिम तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि दोनों में तालमेल नहीं होगा। क्योंकि चुनाव अभी अगले साल हैं। 10 महीने से ज्यादा का समय बचा है। इस बीच राजनीति में बहुत कुछ बदल सकता है। लेकिन मोटे तौर पर अमित शाह ने भाजपा की रणनीति जाहिर कर दी है। भाजपा के कई नेता मान रहे हैं कि अकेले लड़ने से भाजपा का आधार बढ़ रहा है और लंबे समय में यह उसके लिए अच्छा होगा। अब तो अकाली दल के नेता सुखबीर बादल ने भी कह दिया है कि दिल्ली वाली पार्टियों को चुनाव हराना है।
इसके पीछे यह भी कारण बताया जा रहा है कि भाजपा को फीडबैक मिली है कि अकाली दल के साथ जाने पर भी बड़ा फायदा नहीं होना है। बताया जा रहा है कि अकाली दल को हिंदू वोट नहीं मिलेगा और भाजपा को सिख वोट नहीं देंगे। इसलिए तालमेल का फायदा दोनों में से किसी को नहीं मिलेगा। मुख्य मुकाबला कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच ही होना है। ऐसे में भाजपा की रणनीति किसी हाल में कांग्रेस को रोकने की है। यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा और अकाली दल के लड़ने पर कांग्रेस को फायदा होने की संभावना है। इसलिए भी शायद दोनों साथ मिल कर नहीं लड़ें।
