पंजाब में भारतीय जनता पार्टी नए प्रयोग कर रही है। यह नहीं कहा जा सकता है कि उसे इन प्रयोगों से क्या हासिल होगा लेकिन यह समझना होगा कि भाजपा किसी भी राज्य में हिम्मत नहीं हारती है। भले स्थितियां उसके कितनी भी प्रतिकूल है। पंजाब इसकी मिसाल है। वहां आबादी की संरचना और दूसरे राजनीतिक कारणों से भाजपा की राह बहुत मुश्किल है। फिर भी भाजपा ने आम आदमी पार्टी में तोड़ फोड़ की है। उसके छह राज्यसभा सांसदों को अपनी पार्टी में मिलाया है। अभी हुए स्थानीय निकाय चुनावों में कुछ इलाकों में भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि वह आप, कांग्रेस, निर्दलीय और अकाली दल के बाद पांचवें स्थान पर रही है। इस बीच भाजपा ने पंजाब के एक बड़े कारोबारी डॉक्टर केवल सिंह ढिल्लों को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। वे कांग्रेस छोड़ कर आए पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते हैं। सुनील जाखड़ की जगह उनको प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।
ध्यान रहे भारतीय जनता पार्टी पंजाब में हिंदू वोटों की राजनीति करती है और उसे सिख वोट अकाली दल के सहारे मिलते थे। लेकिन अब दोनों अलग हो गए हैं। फिर भी कायदे से भाजपा का फोकस हिंदू वोटों पर होना चाहिए। इसके लिए सुनील जाखड़ सबसे उपयुक्त नेता थे। लेकिन भाजपा ने हिंदू प्रदेश अध्यक्ष हटा कर जाट सिख अध्यक्ष बनाया है। इसका एक अर्थ तो यह है कि भाजपा कोई दूसरा हिंदू चेहरा आगे करने की तैयारी कर रही है। क्या वह चेहरा राघव चड्ढा का हो सकता है?
यह भी हो सकता है कि भाजपा मान रही हो कि कांग्रेस ने जिस तरह से राजा अमरिंदर वारिंग और सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे जाट सिख चेहरों को कमान सौंपी है और अकाली दल या वारिस पंजाब दे पूरी तरह से जाट सिख राजनीति करने वाली पार्टियां हैं उसमें हिंदू वोट अपने आप भाजपा को मिलेगा। इसलिए उसने जाट सिख चेहरा आगे किया है। वह हिंदू वोटों को लेकर आश्वस्त है। उसको लग रहा है कि कैप्टेन के परिवार और ढिल्लो के जरिए कुछ जाट सिख वोट मिल जाएं तो वह अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। भाजपा को जाट सिख वोट बंटने की पूरी संभावना दिख रही है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी इसी समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं
