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कांग्रेस की हालत सबसे बुरी

बृहन्नमुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी के चुनाव में सबसे खराब स्थिति कांग्रेस और उसके गठबंधन सहयोगी की है। कांग्रेस को चुनाव से ऐन पहले उद्धव ठाकरे की शिव सेना ने छोड़ दिया। उसने राज ठाकरे से तालमेल कर लिया। शरद पवार की एनसीपी ने भी कांग्रेस को छोड़ दिया। उसने तो पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ा में भाजपा की सहयोगी अजित पवार की एनसीपी के साथ तालमेल कर लिया है। मुंबई में भी शरद पवार की एनसीपी का तालमेल उद्धव और राज ठाकरे की पार्टियों के साथ है। कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे की शिव सेना करीब डेढ़ सौ सीटों पर लड़ रही है, जबकि शरद पवार की पार्टी को 11 सीटें दी गई हैं। बाकी सीटों पर राज ठाकरे की मनसे चुनाव लड़ेगी। उधर भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिव सेना के बीच भी सीटों का बंटवारा हो गया है। यानी ये दो गठबंधन कायदे से चुनाव लड़ रहे हैं।

इस मामले में सबसे कमजोर स्थिति कांग्रेस की दिख रही है। हालांकि मुंबई महानगर में कांग्रेस के पास मुस्लिम, दलित और बिहार, उत्तर प्रदेश के प्रवासियों का अच्छा खासा वोट आधार रहा है। कांग्रेस पार्टी ने अपने वोट आधार को ध्यान में रखते हुए प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी यानी वीबीए के साथ तालमेल किया। गठबंधन में तय हुआ कि कांग्रेस 142 और वीबीए 62 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। बाकी 23 सीटें छोड़ दी गईं अन्य छोटी पार्टियों के लिए। लेकिन मंगलवार, 30 दिसंबर को नामांकन का समय खत्म होने तक गठबंधन को 20 सीटों पर उम्मीदवार ही नहीं मिले। वंचित बहुजन अघाड़ी को जो 62 सीटें दी गई थीं उनमें से उसने 20 सीटें कांग्रेस को लौटा दीं। उसने कहा कि उसके पास उम्मीदवार नहीं हैं। सोचें, कांग्रेस के रमेश चेन्निथला इतने दिनों से चुनाव की तैयारी कर रहे थे। राहुल गांधी ने अपने करीबी हर्षवर्धन सपकाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। लेकिन ऐसी तैयारी हुई कि 10 फीसदी सीटों पर उम्मीदवार ही नहीं मिले!

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