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बिहार के कांग्रेस विधायक राज्यसभा चुनाव के इंतजार में

बिहार में कांग्रेस के छह विधायक हैं इसलिए राज्यसभा सीट से कांग्रेस का कोई मतलब नहीं होना चाहिए। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस के सभी छह विधायक मार्च में होने वाले राज्यसभा चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। असल में बिहार में राज्यसभा की पांच सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से चार सीटें आसानी से भाजपा और जनता दल यू को मिल जाएंगी। पांचवीं सीट के लिए किसी के पास बहुमत नहीं है। एक सीट जीतने के लिए 41 वोट की जरुरत है, जबकि विपक्षी गठबंधन के पास 35 सीटें हैं। दूसरी ओर चार सीट जीतने के बाद सत्तापक्ष के पास 40 वोट बचते हैं। इसलिए सत्तापक्ष की राह आसान है लेकिन वहां गठबंधन में खींचतान की वजह से समस्या है। भाजपा और जदयू अपनी अपनी सीट जीत लेंगे लेकिन पांचवीं सीट किसके खाते में जाती है इस पर लड़ाई निर्भर करेगी। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के 19 विधायक हैं लेकिन चार विधायक वाले राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा अपनी सीट के लिए अड़े हैं और पांच विधायक वाले जीतन राम मांझी को चिराग से समस्या है।

दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन के 35 विधायकों के साथ अगर ओवैसी के पांच विधायक जुड़ जाते हैं उनकी संख्या भी 40 हो जाती है। इनके अलावा बसपा के भी एक विधायक जीते हुए हैं। सो, एक सीट जीतने लायक संख्या दूसरी ओर भी बन जाती है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के छह विधायक, आईआईपी के इकलौते विधायक और बसपा के विधायक अवसर के इंतजार में कहा है। कहा जा रहा है कि राजद की ओर से पांच बार राज्यसभा सांसद रहे प्रेमचंद गुप्ता फिर से लड़ सकते हैं। जो हो दोनों तरफ से ऐसा व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है, जिसको खुल कर पैसे खर्च करने में कोई समस्या नहीं होगी। तभी कहा जा रहा है कि कांग्रेस के छह विधायक भले मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के बुलावे पर दिल्ली आ गए लेकिन उनकी कोई दिलचस्पी कांग्रेस की राजनीति में नहीं है। वे मार्च का इंतजार कर रहे हैं कि कोई राज्यसभा उम्मीदवार उनसे संपर्क करे और उनका समर्थन मांगे। राज्यसभा चुनाव बीतने के बाद वे आगे की रणनीति बनाएंगे।

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