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राहुल को रैली से रोकने के सारे उपाय

दिल्ली के रामलीला मैदान में एक नवंबर को होने वाले रैली को रोकने या टलवाने के लिए भाजपा की ओर से सारे उपाय किए जा रहे हैं। लेकिन ऐसा लग नहीं रहा है कि राहुल गांधी रैली को टालने वाले हैं। उलटे कांग्रेस पार्टी ने तो इस रैली से पहले नए कार्यक्रमों की घोषणा भी कर दी है। असल में कांग्रेस ने तय किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर की गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन के बीच बहुत ज्यादा अंतराल नहीं रखना है। इसे लोगों की स्मृति बनाए रखना है। दूसरा कारण यह है कि अगर कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां स्पेस देंगी तो दूसरे संगठन उसे स्पेस को कब्जा करेंगे, जैसे पिछले दिनों ‘पीपल अगेंस्ट एसआईआर’ का गठन हुआ और उन लोगों ने दिल्ली में प्रदर्शन भी किया। तभी कांग्रेस ने एक नवंबर की रैली से पहले 30 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ यानी ‘जन महाभियोग’ की भी घोषणा कर दी है। इस तरह दो दिन पहले ही कांग्रेस रामलीला मैदान की रैली का माहौल बनाएगी।

दूसरी ओर भाजपा की तरफ से किसी तरह इस रैली को रूकवाने के उपाय किए जा रहे हैं। दिल्ली के व्यापारी संगठनों की ओर से राहुल गांधी को चिट्ठी लिखने का फैसला विशुद्ध रूप से राजनीतिक है। दिल्ली के और खास कर पुरानी दिल्ली के व्यापारी रामलीला मैदान की रैलियों के बारे में जानते हैं। उनको पता है कि अगर पुलिस बेवजह चारों तरफ बैरिकेडिंग नहीं करे तो कितनी भी बड़ी रैली होगी उससे दो चार घंटे से ज्यादा की डिस्टर्बेंस नहीं होती है। दूसरे अनेक व्यापारी इस तर्क को स्वीकार कर रहे हैं कि अगर दिल्ली के आसपास के राज्यों से हजारों की संख्या में लोग रामलीला मैदान की रैली में पहुंचेंगे तो वे आसपास के बाजारों में दिवाली की खरीद करके जाएंगे। सो, उनको लग रहा है कि रैली की वजह से कुछ अतिरिक्त कारोबार हो सकता है। लेकिन भाजपा और उसका मीडिया व सोशल मीडिया का इकोसिस्टम ऐसा माहौल बना रहा है, जैसे रैली से हजारों करोड़ का नुकसान होगा।

कारोबारियों की चिट्ठी के अलावा भाजपा का दूसरा उपाय एक नवंबर को सिख विरोधी दंगों से जोड़ने का भी है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि राहुल गांधी एक नवंबर को रामलीला मैदान में इसलिए रैली कर रहे हैं क्योंकि वे सिख विरोधी दंगों की याद दिला कर सिखों को जख्मों को हरा करने की कोशिश कर रहे हैं। पहले सोशल मीडिया के जरिए इसका प्रचार किया गया और अब खुल कर भाजपा के नेता यह कह रहे हैं। उनको लग रहा है कि कुछ नहीं होगा तो पंजाब के चुनाव में कुछ वोटों का फायदा हो सकता है। बहरहाल, चाहे व्यापारियों की चिट्ठी हो या सिख विरोधी दंगों से जोड़ने की कोशिश, राहुल गांधी रैली नहीं रोकने वाले हैं। रैली की तैयारियां बहुत बड़े पैमाने पर चल रही हैं। कांग्रेस के संगठन महासचिव अलग अलग राज्यों के नेताओं से मिल कर टारगेट सेट कर रहे हैं। कांग्रेस इस रैली से भाजपा के साथ साथ विपक्ष की अन्य पार्टियों को भी अपनी ताकत का अहसास कराना चाहती है।

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