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ज्ञानेश की तानाशाही किसके कहने पर?

New Delhi, Mar 15 (ANI): Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar addresses a press conference to announce the schedule for assembly elections in Assam, Kerala, Puducherry, Tamil Nadu, and West Bengal, at Vigyan Bhawan in New Delhi on Sunday. (ANI Video Grab)

भारत का चुनाव आयोग कई बरसों से कई कारणों से निशाने पर है। पिछले साल जून में जब बिहार में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का अभियान शुरू किया तब से लेकर अब तक वह एसआईआर में मनमाने तरीके से नाम काटने, नए नाम जोड़ने, नाम हटाने के फैसले की समीक्षा करने जैसे कई मामलों को लेकर ज्यादा निशाने पर है। अब अंग्रेजी के अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें चुनाव आयोग में चल रही कई तरह की गड़बड़ियों और मनमानियों का खुलासा किया है। बुधवार, 23 सितंबर को प्रकाशित इस जांच रिपोर्ट की पहली कड़ी में जो खुलासे हुए हैं वो हैरान करने वाले हैं। इसके हिसाब से साफ दिख रहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार आयोग में तानाशाह की तरह काम कर रहे हैं। हर काम में उनकी मनमानी चल रही है। यहां तक की बाकी दोनों चुनाव आयुक्तों एसएस संधु और विवेक जोशी को पता भी नहीं होता है कि आयोग में क्या फैसले हो रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 महीने में दोनों चुनाव आयुक्तों संधु और जोशी ने 14 बार अलग अलग मुद्दों पर अपनी आपत्ति जताई है या सवाल उठाया है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि एक दिन तो चार बार दोनों आय़ुक्तों ने सवाल उठाए। कई बार उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को सीधे चिट्ठी लिखी और कई बार उनके साथ काम करने वाले उप चुनाव आयुक्तों को चिट्ठी लिखी लेकिन वह चिट्ठी भी मुख्य चुनाव आयुक्त को मार्क की गई। लेकिन किसी भी चिट्ठी का न कोई प्रत्युत्तर मिला और न कोई कार्रवाई हुई। रिपोर्ट में बताया गया है कि थक हार कर दोनों आयुक्तों ने कई बड़ी गड़बड़ियों की जानकारी देश के सबसे बड़े अधिकारी यानी कैबिनेट सचिव को भी दी। शिकायतें सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त के मनमाने तरीके से काम करने के नहीं हैं, बल्कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कई कामों को गैरकानूनी भी बताया है। इस पूरे मामले में चुनाव आयोग की ओर से सिर्फ यह सफाई आई है कि सारे फैसले एक राय से किए गए हैं।

बहरहाल, अब ऐसा नहीं हो सकता है कि कैबिनेट सचिव की ओर से उस शिकायत पर मुख्य चुनाव आयुक्त से कुछ नहीं हो पूछा गया हो या आगे इन शिकायतों की खबर प्रधानमंत्री कार्यालय तक नहीं पहुंची हो। लेकिन इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। ध्यान रहे दोनों चुनाव आयुक्त 1988 और 1989 बैच के सीनियर आईएएस अधिकारी हैं। संधु उत्तराखंड के मुख्य सचिव रहे हैं और जोशी हरियाणा के मुख्य सचिव रहे हैं। दोनों को भारत सरकार के साथ काम करने का अनुभव है। इसलिए दोनों अधिकारी जानते हैं कि केंद्र सरकार में कैसे कामकाज होता है। लेकिन उनके लिए भी हैरानी की बात है कि ज्ञानेश कुमार की मनमानी के मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त की मनमानियों का ही जिक्र नहीं है, बल्कि उनकी टीम के दूसरे सदस्यों की मनमानी का भी जिक्र है। डीजी आईटी सीमा खन्ना और उनकी टीम किस तरह से काम कर रही है उसके बारे में भी दोनों आयुक्तों ने शिकायत की है। उनकी शिकायत तो कैबिनेट सचिव तक पहुंची थी। फिर भी किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई होने की जानकारी नहीं है।

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