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चुनाव से पहले भाजपा के कैसे कैसे दांव

हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों के लिए शनिवार, पांच अक्टूबर को वोटिंग हो रही थी। लोग वोटिंग की लाइन में खड़े थे और उसी समय लोगों के मोबाइल फोन पर मैसेज आने शुरू हो गए कि उनके खाते में दो दो हजार रुपए जमा हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के वाशिम में एक बटन दबाया और किसानों के खाते में पैसे पहुंचने शुरू हो गए। किसी तरह से चुनाव जीतने या हार का अंतर कम करने की बेचैन कोशिश के तहत भाजपा की सरकार ने यह दांव आजमाया है। हैरानी है कि चुनाव आयोग ने कैसे इसकी मंजूरी दी? क्या यह पैसा एक दिन बाद यानी छह अक्टूबर को किसानों के खाते में नहीं जा सकता था? यह कहने का भी कोई मतलब नहीं है कि पांच अक्टूबर का दिन पहले से तय था। अगर पांच अक्टूबर का दिन पहले से तय था तो चुनाव आयोग ने क्यों हरियाणा की चुनाव की तारीख एक अक्टूबर से बढ़ा कर पांच अक्टूबर किया?

गौरतलब है कि हरियाणा में पहले एक अक्टूबर को मतदान होना था। लेकिन बिश्नोई समाज के त्योहार और लंबी छुट्टी की गणना के बाद चुनाव आयोग ने तारीख बढ़ा कर पांच अक्टूबर कर दी। उस समय तक ऐसी कोई सूचना नहीं थी कि किसान सम्मान निधि का पैसा किस दिन किसानों के खाते में जाएगा। लेकिन ऐन मतदान से पहले अखबारों में विज्ञापन और खबरें छपीं कि पांच अक्टूबर को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का पैसा किसानो के खाते में जाएगा। चुनाव आयोग इसे रोक सकता था। लेकिन लोगों के मतदान व्यवहार को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाला यह काम आयोग ने होने दिया।

जाहिर है, जब चुनाव आयोग ने ऐन मतदान के दिन लोगों के खाते में पैसा डालने का फैसला नहीं टलवाया तो पहले हुए नीतिगत फैसलों पर वह क्या कर सकती थी? ध्यान रहे हरियाणा खेती किसानी वाला प्रदेश है। जवान, पहलवान और किसान सबसे प्रभावी समूह हैं। दूसरे, देश के उन चुनिंदा राज्यों में है, जहां शाकाहारी आबादी मांसाहारी आबादी से ज्यादा है। राज्य में दूध दही का खाना माना जाता है। तभी महाराष्ट्र सरकार द्वारा गाय को ‘राज्यमाता गौमाता’ घोषित करने का फैसला भी कहीं न कहीं हरियाणा के चुनाव को भी ध्यान में रख कर किया गया है। महाराष्ट्र पहला राज्य है, जिसने ऐसा किया है।

इसी तरह किसानों को ध्यान में रख कर केंद्र सरकार ने कुछ समय पहले प्याज और बासमती चावल के निर्यात के लिए तय न्यूनतम निर्यात मूल्य की सीमा समाप्त कर दी। इस सीमा की वजह से किसान अपनी फसल का निर्यात नहीं कर पा रहे थे। प्याज का फैसला महाराष्ट्र को ध्यान में रख कर किया गया तो बासमती चावल का फैसला हरियाणा को ध्यान में रख कर किया गया। इस फैसले से भी केंद्र सरकार ने दो बड़े नीतिगत फैसले किए थे। उसने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना से मिलती जुलती एकीकृत पेंशन योजना लागू करने का ऐलान किया। इसके बाद आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत 70 साल से ऊपर के सभी बुजुर्गों को पांच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की घोषणा की। इन तमाम नीतिगत फैसलों के मामले में भी चुनाव आयोग मूकदर्शक बना रहा।

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