नीट यूजी के पेपर लीक और सीबीएसई के 12वीं को बोर्ड परीक्षा की ऑनस्क्रीन मार्किंग में हुई समस्या के बाद से आंदोलित युवाओं का गुस्सा दिल्ली की सड़कों पर दिखा है। जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने छात्रों और युवाओं को अपना गुस्सा जाहिर करने का मौका दिया। सरकार ने पहले नहीं सोचा था कि यह इतना बड़ा मुद्दा बन सकता है। तभी उसने इसे बढ़ने दिया था। लेकिन अब सरकार सक्रिय हो गई है। इसका एक कारण तो यह है कि मुद्दा अगर तुरंत शांत नहीं हुआ तो देश के दूसरे हिस्सों में भी शुरू हुआ आंदोलन फैलने लगेगा। लोगों के दिमाग में बात बैठेगी कि सरकार चुपचाप तमाशा देख रही थी। दूसरा कारण यह है कि संसद का मानसून सत्र छोटा है और इस बार सत्र में सरकार को कई जरूरी विधेयक पास कराने हैं। उसमें सरकार को कई विरोधी पार्टियों के समर्थन की भी जरुरत है।
अगर यह मामला जल्दी नहीं सुलझता है तो विपक्षी पार्टियों को समझा कर साथ लाना थोड़ा मुश्किल होगा। इसलिए सरकार ने 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को जेपी नड्डा से बात करने के लिए बुलाया। 20 जुलाई के प्रदर्शन मे पुलिस की कार्रवाई में घायल हुए छात्रों को देखने के लिए स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा अस्पताल पहुंचे। इसका भी सकारात्मक संदेश गया है। उसके बाद सरकार ने सोनम वांगचुक को भी गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट कर दिया। कहा जा रहा है कि जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने उनसे मुलाकात भी की है। सो, कुल मिला कर सरकार ने मामले को सुलझाने की प्रक्रिया तेज कतर दी है। कहा जा रहा है कि इस हफ्ते सरकार को किसी तरह से यह प्रदर्शन समाप्त कराना है ताकि संसद सत्र में कामकाज आगे बढ़े।
