संसद के मानसून सत्र में पहले तीन हफ्ते तक विपक्ष ने अपना एजेंडा चलाया। लेकिन आखिरी हफ्ते में आकर कहानी बदल गई। झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस के लाठीचार्ज करने के बाद माहौल बदल गया। सोमवार, 10 अगस्त को हेमंत सोरेन की पुलिस ने छात्रों पर लाठी चलाई और मंगलवार, 11 अगस्त को विपक्ष बैकफुट पर आ गया। राहुल गांधी दिखाई नहीं दिए। न कोई सोशल मीडिया पोस्ट और न प्रेस कॉन्फ्रेंस। एक दिन पहले सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उन्होंने गोल पोस्ट बदल दिया था। पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया, प्रधानमंत्री माफी मांगे और चढ़ावा चोरी पर चर्चा हो, यह शर्त उन्होंने रखी। उससे पहले अमित शाह के सदन में आकर जवाब देने की मांग हो रही थी। मंगलवार को प्रियंका गांधी वाड्रा सदन में जरूर दिखीं, लेकिन जब एनडीए के सांसदों ने उनको घेरा और कहा कि वे रांची जाएं तो वे मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गईं। उन्होंने बाद में मीडिया को जरूर बाइट दी। लेकिन मंगलवार सुबह संसद परिसर का माहौल बिल्कुल बदला हुआ था। बुधवार को भी संसद परिसर का माहौल ऐसा ही था। भाजपा के सांसद रांची की घटना पर प्रदर्शन कर रहे थे और कांग्रेस सांसदों के हाथ से अमित शाह जवाब दो के बैनर गायब थे।
इस बदले माहौल से ऐसा नहीं है कि सिर्फ सरकार खुश है, बल्कि कांग्रेस की सहयोगी समाजवादी पार्टी के नेता भी खुश हैं। पहली बार उनके एजेंडे को इतनी तवज्जो मिंल रही है। ध्यान रहे समाजवादी पार्टी के नेता पहले दिन से चाह रहे थे कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के मसला प्रमुखता से उठाया जाए। इसके लिए सपा के सांसद हर दिन संसद परिसर में दान पेटी रख कर प्रदर्शन करते थे। कांग्रेस ने तो एक दिन पप्पू यादव से प्रदर्शन कराया और सारा मामला बिगाड़ दिया धा। लेकिन अब सपा ने इसे फिर संभाला है। उसको लग रहा है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिहाज से चढ़ावा चोरी का मामला बड़ा भावनात्मक मुद्दा है, जिस पर व्यापक हिंदू गठबंधन की भाजपा की कोशिश को चैलेंज किया जा सकता है। अगर व्यापक हिंदू एकता किसी वजह से टूटेगी तभी अखिलेश यादव के पीडीए यानी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक का गठबंधन काम करेगा। वे गैर यादव पिछड़ा और गैर जाटव दलित वोट हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में यह वोट उनको मिला था।
बहरहाल, झारखंड में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस के लाठी चलाने से कांग्रेस का यह एजेंडा कमजोर हुआ कि जंतर मंतर पर पुलिस ने छात्रों पर लाठी चलाई थी। रांची में तो प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कई बार लाठी चली। रात के अंधेरे में पुलिसकर्मियों ने लाठी चला कर छात्रों को विधानसभा के पास से खदेड़ा। छात्रों को रोकने के लिए कंटीले तारों की बाड़ लगाई गई थी, जिससे कई छात्र घायल हुए। सवाल है कि झारखंड सरकार ने जब छात्रों की 98 फीसदी मांगें मान लीं तो दो फीसदी के लिए क्यों इतना हंगामा होने दिया? दूसरा सवाल यह है कि राहुल गांधी और कांग्रेस के प्रबंधकों को भी पता होगा कि 10 अगस्त को जब छात्र विधानसभा घेरने निकलेंगे तो उन्हें रोकने के लिए पुलिस कार्रवाई होगी, फिर राहुल ने हेमंत से बात करके पहले ही आंदोलन समाप्त करने का प्रयास क्यों नहीं किया? क्या हेमंत ने राहुल को कोई वादा किया था? अब कई तरह की चर्चाएं हैं। लेकिन हकीकत यह है कि हेमंत सरकार की पुलिस ने जो कार्रवाई की, उससे दिल्ली में और अखिल भारतीय स्तर पर कांग्रेस का एजेंडा पंक्चर हुआ है। हेमंत को इससे क्या फायदा होगा यह नहीं कहा जा सकता है लेकिन धारणा के स्तर पर कांग्रेस व राहुल गांधी को बड़ा नुकसान हुआ है।
