ऐसा लग रहा है कि झारखंड में सहयोगी पार्टियों ने कांग्रेस को उसके हाल पर छोड़ दिया है। हालांकि इस बारे में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं का अनौपचारिक बातचीत में यही कहना है कि शुरुआत कांग्रेस ने की थी। कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए बिना बात किए एकतरफा तरीके से उम्मीदवार की घोषणा कर दी थी। जेएमएम के नेताओं का कहना है कि अगर कांग्रेस की ओर से हेमंत सोरेन से बात की जाती और तब प्रणब झा के नाम की घोषणा होती तो उसका श्रेय हेमंत सोरेन को जाता है और फिर उनके नेतृत्व में ही राज्यसभा का चुनाव लड़ा जाता। हालांकि एक बार कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार घोषित हो गया तो हेमंत सोरेन उनके साथ नामांकन कराने गए। हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन सहित जेएमएम के दूसरे नेता गुजरात के कारोबारी परिमल नाथवानी को राज्यसभा चुनाव में समर्थन करने के लिए भाजपा पर हमला भी कर रहे हैं लेकिन ऐसा लग नहीं रहा है कि वे कांग्रेस की मदद में पूरी तरह से खड़े हैं।
इसका संकेत पिछले दिनों मिला, जब कांग्रेस ने परिमल नाथवानी के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस ने उनके नामांकन पत्र में तीन कमियां बताईं। इन्हें देखने के बाद चुनाव अधिकारी ने नामांकन होल्ड पर रख दिया। सोचें, इससे कम गड़बड़ी में मध्य प्रदेश में चुनाव अधिकारी ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया। लेकिन झारखंड में चुनाव अधिकारी ने जो विधानसभा के सचिव हैं, उन्होंने नामांकन होल्ड किया और अगले दिन उसे मंजूर कर लिया। यहां तक कहा जा रहा है कि नामांकन की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद दूसरा नामांकन लिया गया। कांग्रेस ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किया तो किसी सहयोगी पार्टी ने उसका साथ नहीं दिया। उलटे कांग्रेस के विधायक और दूसरे नेता विधानसभा में प्रदर्शन करने गए तो पुलिस ने उन्हें रोका और परेशान किया, जिसकी शिकायत उन्होंने की। सहयोगी पार्टियों के रुख से अंदाजा लग रहा है कि चुनाव नतीजा क्या होगा।
