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बिहार में दलित वोट की राजनीति तेज हुई

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बिहार में पिछले साढ़े तीन दशक से पिछड़ा राजनीति होती रही है। लालू प्रसाद और नीतीश कुमार बिहार की राजनीति का चेहरा रहे हैं। साढ़े तीन दशक में पहली बार ऐसा हो रहा है कि बिहार में दलित राजनीति जोर मार रही है और साथ ही अगड़ी जातियां भी अपनी पोजिशनिंग कर रही हैं। प्रशांत किशोर के जन सुराज पार्टी बना कर मैदान में उतरने से सभी पार्टियों के अंदर अगड़ी जातियों के नेताओं की पूछ बढ़ी है तो दूसरी ओर 20 फीसदी दलित वोट के लिए भी पार्टियों के भीतर घमासान छिड़ा है। चिराग पासवान ने विधानसभा का चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है तो जीतन राम मांझी केंद्रीय मंत्री बनने के बाद कुछ ज्यादा की सक्रिय हो गए हैं।

इस राजनीति के बीच कांग्रेस ने प्रदेश में दलित समाज के राजेश राम को अध्यक्ष बनाया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हैं हीं। बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम जिस दलित जाति से आते हैं उसका रूझान पिछले कई चुनावों से राजद और कांग्रेस की ओर दिख रहा है। तभी भाजपा और जनता दल यू में चिंता बढ़ी है। उनको पासवान और मांझी वोट का भरोसा है लेकिन रविदास वोट को लेकर मुश्किल है। इस बात को ध्यान में रखते हुए जनता दल यू ने कांग्रेस के बड़े दलित नेता अशोक राम को तोड़ लिया है। वे पहले कांग्रेस विधायक दल के नेता भी रहे हैं और रविदास समाज में अच्छा असर रखते हैं। वे जनता दल यू में शामिल हो गए हैं। माना जा रहा है कि वे राजेश राम के असर को कुछ कम कर सकते हैं। खास कर प्रदेश के पूर्व व मिथिलांचल वाले इलाके में।

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