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डीएमके से पावर शेयरिंग का विवाद

तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके ने कांग्रेस और दूसरी सहयोगी पार्टियों के साथ सीट शेयरिंग को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। बता दिया गया है कि 22 फरवरी से इस बारे में बातचीत होगी। हालांकि यह भी कह दिया गया है कि पहले के फॉर्मूले में कोई बदलाव नहीं होगा। यानी कांग्रेस को 25 ही सीटें मिलेंगी। लेकिन अब नए सिरे से कांग्रेस नेताओं ने सत्ता में साझेदारी का राग छेड़ दिया है। इस बार विरूद्धनगर के सांसद मणिकम टैगोर ने मुद्दा उठाया है। ध्यान रहे मणिकम टैगोर को कांग्रेस सुप्रीमो राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। राहुल की कोर टीम में वे शामिल हैं। इसलिए उनका यह मुद्दा उठाना अहम है।

मणिकम टैगोर ने कहा है कि कांग्रेस ने पहले मौका गंवाया था। उन्होंने 2006 की मिसाल दी, जब डीएमके को 234 सदस्यों की विधानसभा में सिर्फ 96 सीटें मिली थीं। लेकिन तब भी कांग्रेस ने 34 विधायकों का बाहर से समर्थन दिया था। पीएमके और सीपीआई ने भी बाहर से समर्थन देकर सरकार बनवाई थी। मणिकम टैगोर चाहते हैं कि अब वैसी गलती नहीं हो। उन्होंने कहा है कि सरकार एक पार्टी की बनेगी या गठबंधन की सरकार होगी यह फैसला राज्य की जनता करेगी। अब सवाल है कि क्या वे ऐसे जनादेश की संभावना देख रहे हैं, जिसमें डीएमके को अकेले बहुमत नहीं मिलेगा? ध्यान रहे अभी डीएमके को अकेले बहुमत है। जाहिर है कि कांग्रेस सांसद इस बार कड़ा मुकाबला देख रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि डीएमके को अकेले पूर्ण बहुमत यानी 118 सीटें नहीं मिलेंगी। अगर सचमुच नजदीकी मुकाबला है तो यह पूरे गठबंधन के लिए चिंता की बात है औऱ अकेले डीएमके को 118 सीटें नहीं मिलीं ती कांग्रेस दबाव डाल कर गठबंधन की सरकार बनवाएगी।

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