Tamil Nadu politics

  • तमिलनाडु के घटनाक्रम का मजाक

    तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर सोशल मीडिया में मजाक का विषय बने हैं। उन्होंने जिस तरह से फिल्म स्टार विजय की पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने में देरी की और इस दौरान जैसे जैसे घटनाक्रम हुए उसे लेकर खूब मीम और मजाक चल रहे हैं। असल में अगर कोई राजनीतिक मकसद नहीं होता तो विजय को पहली बार में ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाना था। यह सबको दिख रहा था कि एक नई बनी पार्टी ने अपने पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीती हैं और वह बहुमत से सिर्फ 10 सीट पीछे...

  • विकल्प अल्पमत सरकार का

    क्या तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लागू करने की जरूरत पड़ेगी? यह अपेक्षित स्थिति नहीं होगी। विधानसभा चुनाव में टीवीके भले बहुमत की संख्या से पीछे रह गई हो, लेकिन निर्विवाद रूप से उसकी राजनीतिक विजय हुई है। तमिलगा वेट्री गड़गम (टीवीके) के नेता विजय से बहुमत लायक संख्या दिखाने की मांग कर राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने के.आर. नारायणन परिपाटी का पालन किया है। राजनीतिक अस्थिरता के उस दौर में तत्कालीन राष्ट्रपति नारायणन ने सरकार बनाने का आमंत्रण देने के पहले बहुमत के बारे में आश्वस्त होने की परंपरा तय की थी। उसके पहले सबसे बड़े दल के नेता को आमंत्रित...

  • तमिलनाडु में भी पैसे बांट कर ही जीतेंगे

    राजनीतिक विश्लेषक बेवजह बिहार, झारखंड या उत्तर भारत की गोबरपट्टी के राज्यों की आलोचना करते हैं कि वहां पैसे बांट कर चुनाव जीता जाता है। लोग गरीब हैं इसलिए सरकारें ‘मुफ्त की रेवड़ी’ बांट कर चुनाव जीत जाती हैं। असल में चुनाव जीतने का यह फॉर्मूला यूनिवर्सल हो गया है। विकसित राज्य भी इसका ही सहारा ले रहे हैं। महाराष्ट्र के बाद अब सबसे ज्यादा जीडीपी वाले राज्यों में से एक तमिलनाडु में भी यही तरीका आजमाया जा रहा है। वैसे तमिलनाडु में पहले से पैसे बांट कर वोट लिए जाते थे। लेकिन तब पार्टियां लोगों को चोरी छिपे नकद पैसे देती...

  • डीएमके सहयोगियों की हैसियत घटेगी

    कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने डीएमके पर काफी दबाव बनाया था। कांग्रेस के साथ साथ कुछ और पार्टियां चाहती थीं कि डीएमके उनके लिए ज्यादा सीट छोड़े और चुनाव जीतने के बाद सरकार में शामिल करे। ध्यान रहे अभी डीएमके का अकेले बहुमत है और सरकार में किसी दूसरी सहयोगी पार्टी को उसने नहीं शामिल किया है। इस बार भी डीएमके अकेला 175 सीटें लड़ने वाली थी। बाकी सभी एक दर्जन पार्टियों के लिए उसने 59 सीटें छोड़ी थीं। इस बार चुनाव के पहले मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कुछ और पार्टियों को सरकार में शामिल किया है, जिनमें एक कमल...

  • डीएमके से पावर शेयरिंग का विवाद

    तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके ने कांग्रेस और दूसरी सहयोगी पार्टियों के साथ सीट शेयरिंग को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। बता दिया गया है कि 22 फरवरी से इस बारे में बातचीत होगी। हालांकि यह भी कह दिया गया है कि पहले के फॉर्मूले में कोई बदलाव नहीं होगा। यानी कांग्रेस को 25 ही सीटें मिलेंगी। लेकिन अब नए सिरे से कांग्रेस नेताओं ने सत्ता में साझेदारी का राग छेड़ दिया है। इस बार विरूद्धनगर के सांसद मणिकम टैगोर ने मुद्दा उठाया है। ध्यान रहे मणिकम टैगोर को कांग्रेस सुप्रीमो राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। राहुल की...

  • अन्नामलाई ने क्यों पल्ला झाड़ लिया?

    तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी ने बहुत मेहनत की है। खास तौर से अमित शाह ने पूरा दम लगाया है। भाजपा ने अन्ना डीएमके से तालमेल के बाद एनडीए को मजबूत करने वाले कई काम किए हैं। अन्ना डीएमके छोड़ने वाले कई नेताओं को मनाने और वापस एनडीए में लाने का काम भाजपा ने किया है। यह भी कहा जा रहा है कि फिल्म स्टार विजय की पार्टी बनवाने और प्रशांत किशोर को उनका चुनाव रणनीतिकार बनवाने में भी कहीं न कहीं भाजपा की भूमिका है। चुनाव अगर त्रिकोणात्मक होता है तो उसका फायदा एनडीए को हो सकता है। हालांकि...

  • तमिलनाडु में एक और पिता-पुत्र का विवाद

    पट्टाली मक्कल काटची यानी पीएमके नेता एस रामदॉस और उनके बेटे अंबुमणि रामदॉस के बीच विवाद के बाद तमिलनाडु में एक और पिता-पुत्र का विवाद शुरू हो गया है। इस बार एमडीएमके नेता वाइको और उनके बेटे के बीच विवाद हुआ है। यह कमाल की बात है कि जिस तरह महाराष्ट्र में चाचा-भतीजे का विवाद होता है वैसे तमिलनाडु में पिता-पुत्र का विवाद होता है। महाराष्ट्र में ठाकरे परिवार में चाचा-भतीजे का विवाद हुआ तो पवार परिवार में भी हुआ और मुंडे परिवार में भी हुआ। इसी तरह तमिलनाडु में पिता-पुत्र का विवाद करुणानिधि परिवार में हुआ, रामदॉस परिवार में...

  • विजय क्या जिंक्स तोड़ पाएंगे?

    यह लाख टके का सवाल है कि तमिल फिल्मों के सुपर स्टार विजय क्या तमिल राजनीति का पिछले तीन दशक का जिंक्स तोड़ पाएंगे? असल में पिछले कई दशकों से यह धारणा बन गई है कि कोई फिल्मी सितारा तमिलनाडु की राजनीति में सफल नहीं हो सकता है। एमजीआर सबसे सफल अभिनेता और सफल राजनेता रहे और उनके बाद उनकी जगह जयललिता ने ली। एमजीआर और जयललिता के बाद कोई सितारा राजनीति में नहीं चमका। करुणानिधि भी फिल्मों से जुड़े रहे थे लेकिन वे सुपर स्टार नहीं थे। विजय सुपर स्टार हैं और टीवीके नाम से पार्टी बना कर राजनीति...

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