पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस सुप्रीमो राहुल गांधी अंडमान निकोबार द्वीप की यात्रा पर जा रहे हैं। वे 26 से 28 फरवरी तक इस खूबसूरत द्वीप समूह की यात्रा करेंगे। पार्टी की ओर से बताया गया है कि वे वहां के स्थानीय लोगों और खास कर अनुसूचित जनजाति के लोगों से मिलेंगे। गौरतलब है कि एक बड़ी परियोजना के तहत केंद्र सरकार निकोबार द्वीप को पर्यटक स्थल के तौर पर विकसित कर रही है। कांग्रेस और दूसरी कई पार्टियां इसका विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि इससे जनजातीय समूहों और समुद्री पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचेगा।
सवाल है कि क्या सचमुच राहुल गांधी निकोबार परियोजना का विरोध करने के लिए जरूरी सामग्री जुटाने के मकसद से अंडमान और निकोबार की यात्रा पर गए हैं? ऐसा नहीं है। वे घूमने गए हैं। पश्चिम बंगाल में दो दिन की चुनावी सभा करने के बाद थक गए होंगे इसलिए आराम की जरुरत होगी। सोचें, कांग्रेस ने एक बार में बंगाल की 284 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए थे। दो दशक से ज्यादा समय के बाद कांग्रेस पहली बार चुनाव लड़ रही है। पिछली बार खाता नहीं खोल पाई कांग्रेस इस बार कुछ सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है। लेकिन राहुल सिर्फ दो दिन चुनावी सभा के लिए गए। पहले चरण की 152 सीटों के लिए एक दिन और दूसरे चरण की 142 सीटों के लिए एक दिन।
दूसरे चरण के लिए प्रचार बंद होने से पहले ही वे तीन दिन की अंडमान निकोबार द्वीप समूह की यात्रा पर निकल जाएंगे। ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए नहीं गए तो उन्होंने पार्टी के दूसरे नेताओं को प्रचार में लगाया। कांग्रेस ने स्थानीय नेताओं पर ही प्रचार का पूरा जिम्मा छोड़ दिया। प्रियंका गांधी वाड्रा भी पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार करने नहीं गई। सोचें, भाजपा का बंगाल में कोई आधार नहीं था। 2016 में उसके सिर्फ तीन विधायक थे तो उसने 2021 के चुनाव में उसे 77 सीट पर पहुंचा दिया। दूसरी ओर 2016 में कांग्रेस 44 सीट के साथ राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी थी और 2010 में शून्य सीट पर आ गई। उसका पुराना आधार प्रदेश में रहा है लेकिन वह चुनाव लड़ने से भागती रही।
