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अखिलेश का दांव या अपने पैर पर कुल्हाड़ी?

अखिलेश यादव ने पूरे देश को चौंकाया है। कम से कम जिन लोगों की राजनीति में रूचि है उनके लिए तो यह घनघोर हैरानी की बात थी कि अखिलेश ने रिलायंस समूह के प्रेसिडेंट परिमल नाथवानी के बेटे धनराज परिमल नाथवानी को अपनी पार्टी से राज्यसभा की टिकट दी। सोचें, यह कितनी हैरानी की बात है कि राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले गुजरात के रहने वाले, रिलायंस समूह के ग्रुप प्रेसिडेंट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी के परिमल नाथवानी के बेटे को अखिलेश ने टिकट दी! खुद अखिलेश ने उनका नामांकन कराया। रामगोपाल यादव और धनराज नाथवानी ने बुधवार की सुबह 11 बजे एक साथ नामांकन किया। धनराज नाथवानी को टिकट देकर अखिलेश यादव ने जो दांव चला है वह भारत की राजनीति को प्रभावित करने वाला है। परिमल नाथवानी झारखंड से राज्यसभा के सांसद हैं। वे भाजपा के समर्थन से निर्दलीय चुनाव जीते हैं और अब उनके बेटे को समाजवादी पार्टी राज्यसभा भेज रही है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों राहुल गांधी ने इंदौर में एक कार्यक्रम किया, जिसमें गौतम अडानी और मुकेश अंबानी दोनों को सिस्टम का हिस्सा बनाया। लेकिन उसके एक हफ्ते बाद ही दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो उसमें ‘लोकतंत्र के दुश्मनों’ की सूची से मुकेश अंबानी की तस्वीर हटा दी। अभी इसके कयास लगाए ही जा रहे थे कि ऐसे क्यों हुआ कि अखिलेश यादव ने मुकेश अंबानी की कंपनी के ग्रुप प्रेसिडेंट परिमल नाथवानी के बेटे धनराज को राज्यसभा भेजने का फैसला कर लिया। यह न तो अनायास हुआ काम है और मामूली काम है। इससे दो सबसे बड़े कारोबारी घरानों का मामला भी जुड़ रहा है।

परिमल नाथवानी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है। वे भाजपा के समर्थन से राज्यसभा गए हैं। उनके बेटे को राज्यसभा भेज कर अखिलेश ने न सिर्फ मुकेश अंबानी से करीबी दिखाई है, बल्कि इससे भाजपा से भी उनकी करीबी जाहिर होती है। पांच महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में इसका नुकसान हो सकता है। लेकिन अभी तो अखिलेश ने दिल्ली में हुई ‘इंडिया’ ब्लॉक की सारी चमक छीन ली। विपक्ष की बैठक से ज्यादा फोकस धनराज परिमल नाथवानी को टिकट देने पर हो गया।

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