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पित्रोदा से कांग्रेस को पहले भी मुश्किल

इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा और विवाद का नाता पुराना है। उन्होंने कई बार कांग्रेस को ऐसी स्थिति में डाला है कि पूरी पार्टी उनके बयान पर सफाई देती रही है या पल्ला झाड़ती रही है। असल में वे दशकों से अमेरिका में रहते हैं तो उनके सोचने समझने का तरीका अमेरिकी हो गया है और उसी अंदाज में वे बोल भी देते हैं। वे भारतीय जीवन शैली भूल गए हैं, जिसमें सोचना कुछ और होता है, बोलना कुछ और होता है और करना कुछ और होता है। यहां सच बोलना नेताओं के लिए आत्मघाती हो सकता है। तभी जब उन्होंने भारत में अमेरिका की तरह विरासत टैक्स पर चर्चा की बात कही तो भाजपा ने तुरंत इसे मुद्दा बना दिया और कांग्रेस को बैकफुट पर आना पड़ा। कांग्रेस ने इस बयान से पल्ला झाड़ लिया है। 

इससे पहले पिछले चुनाव के समय यानी 2019 में उन्होंने एक इंटरव्यू में 1984 के सिख विरोधी दंगों पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कह दिया था कि उस समय जो हुआ सो हुआ। हो सकता है कि वे कहना चाह रहे हों कि उससे आगे बढ़ा जाए लेकिन उनके कहे का मतलब यह निकाला गया कि वह कोई बड़ी बात नहीं थी। बाद में कांग्रेस ने उनकी हिंदी भाषा की कमजोरी के बहाने इस बयान से पीछा छुड़ाया। उसी समय उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर सवाल उठाया था और यहां तक कह गए थे कि आठ लोग आए हमला करने तो उसके लिए एक पूरे देश को यानी पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराने की जरुरत नहीं है। वे इसी संदर्भ में 2008 के मुंबई हमले का भी जिक्र कर गए और कहा कि तब भी हमला हुआ था लेकिन कांग्रेस ने पलट कर हमला नहीं किया।  

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