पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का काम समाप्त ही नहीं हो रहा है। एक एक करके सभी राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी हो रही है। लेकिन बंगाल में खुद उच्च अदालतों ने कहा है कि अगर इसी रफ्तार से न्यायाधिकरण में लोगों के नामों की जांच का मामला निपटाया जाएगा तो प्रक्रिया पूरी होने में 20 साल से ज्यादा का समय लगेगा। ध्यान रहे सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाए गए 19 न्यायाधिकरण उन लोगों के दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं, जिनका नाम तार्किक विसंगति के आधार पर कटा है। करीब 27 लाख लोगों के नाम तार्किक विसंगति के आधार पर कटे हैं और अभी तक एक लाख लोगों के दस्तावेजों की भी जांच नहीं हो पाई है।
लेकिन समस्या इतनी नहीं है। असली समस्या यह है कि मीडिया में कुछ भी कहा जाए या अदालतें कुछ भी कहें चुनाव आयोग ने इस पर पूरी तरह से मुंह बंद कर रखा है। चुनाव आयोग की ओर से कुछ नहीं कहा जा रहा है। दूसरी ओर जिनके नाम तार्किक विसंगति के आधार पर मतदाता सूची से हटा दिए हैं। उनके ऊपर अलग तलवार लटक रही है। उनको समझ में नहीं आ रहा है कि उनके साथ क्या होगा। इस बीच राज्य में ऐसे लोगों को सरकारी योजनाओं से वंचित करने का काम शुरू हो गया है। लोग इस आशंका में हैं अभी सरकारी योजनाएं बंद की जा रही हैं और फिर थोड़े समय के बाद उनको देश से निकालने की प्रक्रिया न शुरू हो जाए। ध्यान रहे जिनके दस्तावेजों में सचमुच की गड़बड़ी है वैसे बहुत से लोग तो खुद ही छोड़ कर जा रहे हैं। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके दस्तावेज सही हैं। उनको ज्यादा चिंता सता रही है।
