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अन्नामलाई मौका चूक गए

पूर्व आईपीएस अधिकारी और तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई नए सिरे से अपनी राजनीति को संवारने की कोशिश कर रहे हैं। वे दिल्ली में हैं और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से मिल कर पार्टी से विदाई चाहते हैं। गौरतलब है कि उनको इस बार विधानसभा की टिकट नहीं मिली थी। वे कोयम्बटूर उत्तर की सीट लड़ना चाहते थे लेकिन अन्ना डीएमके ने सीट नहीं छोड़ी। इससे पहले अन्नमलाई दो बार चुनाव हार चुके हैं। वे 2021 का विधानसभा और 2024 का लोकसभा चुनाव लड़े थे लेकिन जीत नहीं पाए थे। अब वे तमिल उप राष्ट्रीयता का मुद्दा लेकर अलग राजनीति करना चाहते हैं। उनको पता है कि भाजपा के साथ यह राजनीति संभव नहीं है। ध्यान रहे उनके साथ युवाओं का समर्थन है और वे अपनी अतरंगी राजनीतिक गतिविधियों से खबरें भी बनाते रहते हैं।

परंतु मुश्किल यह है कि उनके लिए तमिलनाडु में राजनीतिक स्पेस नहीं बन पा रहा है। दूसरी बात यह है कि पिछले 60 साल से द्रविड राजनीति कर रही दोनों पार्टियों डीएमके और अन्नाडीएमके से अलग एक राजनीति शुरू करना चाहते हैं लेकिन इस मामले में भी वे चूक गए। उनसे पहले फिल्म स्टार विजय ने यह राजनीति कर ली। असल में लोग द्रविडियन पार्टियों की राजनीति से उबे हुए थे, जिसका लाभ विजय ने उठा लिया। अगर अन्नमलाई ने पहले ही यह राजनीति की होती तो वे शायद कुछ हद तक कामयाब होते। जिस समय अन्ना डीएमके के दबाव में भाजपा ने उनको प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया था। उसी समय वे अपनी पार्टी बनाते और अलग राजनीति करते तो कुछ अच्छा कर सकते थे। अब अलग पार्टी की राजनीति की संभावनाएं काफी कम हो गई हैं।

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