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स्टालिन को सहयोगियों से मदद नहीं

तमिलनाडु में एमके स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके सबसे ज्यादा भरोसे में है। पार्टी जीत के प्रति आश्वस्त है। लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि को यह अंदाजा है कि इस बार पहले जितनी सीटें नहीं आ रही हैं। पिछली बार डीएमके ने 133 सीट अकेले जीती थी। उसने 234 के सदन में अकेले दम पर बहुमत हासिल किया था। सहयोगी पार्टियों को 42 सीटें मिली थीं। लेकिन स्टालिन ने उनको सरकार में शामिल नहीं किया था। इस बार चुनाव के पहले से कांग्रेस और दूसरी सहयोगी पार्टियों ने साझा सरकार बनाने का दबाव बनाया था।

इस बार एमके स्टालिन की पार्टी पहले से कम सीट लड़ रही है क्योंकि उनको कांग्रेस को तीन अतिरिक्त सीट देनी पड़ी और प्रेमलता विजयकांत की पार्टी डीएमडीके को भी 11 सीटें देकर गठबंधन में एडजस्ट करना पड़ा। इस बार डीएमके 159 सीटों पर लड़ रही है। माना जा रहा है कि इस बार उसके लिए अकेले बहुमत हासिल करना यानी 118 सीट जीतना मुश्किल लग रहा है। इसका कारण यह है कि पांच साल की एंटी इन्कम्बैंसी का असर है तो साथ ही फिल्म अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके भी वोट काट रही है। इसके साथ ही एक बड़ा कारण यह है कि कांग्रेस सहित दूसरी सहयोगी पार्टियों से डीएमके को मदद नहीं मिल रही है। सहयोगी पार्टियों ने चुनाव से पहले गठबंधन में खींचतान का मैसेज बनवाया और चुनाव प्रचार में सब अपने अपने क्षेत्र में बिजी रहे। वे डीएमके के वोट में कुछ भी जोड़ नहीं रहे हैं। इसका नुकसान डीएमके को होगा लेकिन ज्यादा नुकसान सहयोगी पार्टियों को होगा। उनको भी इस बार पहले से कम सीटें मिलने का अनुमान है।

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