MK Stalin

  • तमिलनाडु में मतगणना से पहले एक्टिव हुए स्टालिन

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की मतगणना 4 मई को होनी है। इससे पहले मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने शनिवार को वरिष्ठ डीएमके नेताओं और गठबंधन सहयोगियों के साथ कई अहम बैठकें कर राजनीतिक हालात की समीक्षा की और तैयारियों को अंतिम रूप दिया। चार दिन के कोडाइकनाल दौरे से लौटने के तुरंत बाद स्टालिन ने पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कीं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों की जमीनी स्थिति, मतदान प्रतिशत और चुनाव बाद के आकलन पर विस्तृत फीडबैक लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने डीएमके मुख्यालय अन्ना अरिवालयम में गठबंधन दलों के नेताओं से भी मुलाकात की। बैठक में...

  • स्टालिन को सहयोगियों से मदद नहीं

    तमिलनाडु में एमके स्टालिन और उनकी पार्टी डीएमके सबसे ज्यादा भरोसे में है। पार्टी जीत के प्रति आश्वस्त है। लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि को यह अंदाजा है कि इस बार पहले जितनी सीटें नहीं आ रही हैं। पिछली बार डीएमके ने 133 सीट अकेले जीती थी। उसने 234 के सदन में अकेले दम पर बहुमत हासिल किया था। सहयोगी पार्टियों को 42 सीटें मिली थीं। लेकिन स्टालिन ने उनको सरकार में शामिल नहीं किया था। इस बार चुनाव के पहले से कांग्रेस और दूसरी सहयोगी पार्टियों ने साझा सरकार बनाने का दबाव...

  • केजरीवाल और स्टालिन एक साथ

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की जो भी रिपोर्ट आ रही है उसमें कहा जा रहा है कि तमिलनाडु और उससे सटे केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भाजपा विरोधी गठबंधन में कमजोर कड़ी कांग्रेस है। चुनाव प्रचार समाप्त होने से ठीक पहले सर्वे करने वाली एजेंसियों ने जो डाटा इकट्ठा किया है उसके मुताबिक तमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस का गठबंधन जीत जाएगा लेकिन मुकाबला काफी नजदीकी होगा। अगर ऐसा होता है तो उसके पीछे कांग्रेस को भी एक जिम्मेदार कारण माना जा रहा है। असल में कांग्रेस नेताओं ने चुनाव के पहले से सेकुलर प्रोग्रेसिव अलायंस यानी एसपीए के अंदर अपनी...

  • स्टालिन और राहुल एक साथ मंच पर नहीं आए

    राहुल गांधी बड़ी मुश्किल से तमिलनाडु में प्रचार के लिए गए। शनिवार को उन्होंने कई जगह जनसभाओं को संबोधित किया और डीएमके, कांग्रेस व वीसीके सहित दूसरी सहयोगी पार्टियों के उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे। लेकिन सबसे हैरानी की बात यह रही कि राहुल गांधी और एमके स्टालिन ने कहीं पर मंच साझा नहीं किया। पहले इसको लेकर कयास लगाए जा रहे थे। मंच साझा करेंगे या नहीं करेंगे पर दुविधा थी। कांग्रेस के कई नेताओं ने कहा कि परिसीमन और महिला आरक्षण के बिल को लेकर संसद में जिस तरह की एकजुटता दिखी है वही तमिलनाडु में दिखनी चाहिए।...

  • स्टालिन ने भाजपा को दिया बड़ा झटका

    तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बड़ा झटका दिया है। अमित शाह पिछले कुछ समय से यह प्रयास कर रहे थे कि पूर्व मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम को किसी तरह से एनडीए में लाया जाए। लेकिन उनको लेकर दो तरह की समस्या थी। एक समस्या अन्ना डीएमके पर पूरा कब्जा करके बैठे ई पलानीस्वामी थे, जिन्होंने साफ कर दिया था कि वे पनीरसेल्वम को कबूल नहीं करेंगे। दूसरी ओर पनीरसेल्वम ने भी कहा था कि पलानीस्वामी को नेता घोषित करके चुनाव लड़ा गया तो वे शामिल नहीं होंगे। इस बीच उन्होंने...

  • एसआईआर पर फिर कोर्ट जाने का क्या मतलब?

    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का काम मंगलवार, चार नवंबर से शुरू होने वाला है। उससे पहले तमिलनाडु में डीएमके नेता और राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सभी पार्टियों की बैठक बुला कर तय किया कि इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को बिहार नहीं बनने दिया जाएगा। सोचें, बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हो गई और शुरुआती आपत्तियों को छोड़ दें तो किसी विपक्षी पार्टी को कोई आपत्ति नहीं है। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद किसी पार्टी ने एक भी नाम पर आपत्ति नहीं की और...

  • स्टालिन ने फैसले को ऐतिहासिक बताया

    नई दिल्ली। राज्यपाल द्वारा विधेयक रोके जाने को अवैध बताने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने इसे सभी राज्यों की जीत कहा है। दूसरी ओर कई विपक्षी पार्टियों ने इस फैसले के बाद राज्यपाल आरएन रवि के इस्तीफे की मांग की है। पार्टियों ने कहा है कि अगर रवि इस्तीफा नहीं देते हैं तो उन्हें बरखास्त कर देना चाहिए। बहरहाल, फैसले के बाद स्टालिन ने कहा, ‘यह सिर्फ तमिलनाडु नहीं, बल्कि पूरे देश की राज्य सरकारों की जीत है। अब ये बिल राज्यपाल की मंजूरी वाले माने जाएंगे’। स्टालिन ने...

  • जरूरत राष्ट्रीय बहस की

    chandrababu naidu stalin remarks: वैश्विक अनुभव है कि आर्थिक विकास और महिलाओं के सशक्तीकरण के साथ परिवार छोटा रखने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। इस परिघटना के कारण दक्षिणी राज्यों में जन्म दर अपेक्षित- प्रति महिला 2.1 संतान से भी ज्यादा घट गई है। also read: झारखंड के पूर्व सीएम मधु कोड़ा नहीं लड़ पाएंगे चुनाव पहल मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने की दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनसंख्या नीति जैसे बेहद अहम मुद्दों पर अब राज्य अघोषित रूप से अपनी नीति तय करने लगे हैं। मुमकिन है कि इसके लिए देश में मौजूद सियासी हालात जिम्मेदार हों, फिर भी ऐसे प्रश्नों पर...

  • नायडू और स्टालिन की चिंता निराधार

    आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एक अलग ही विमर्श शुरू कर दिया है। दुनिया के सबसे युवा देश भारत के दो राज्यों के मुख्यमंत्री इस बात को लेकर चिंतित हैं कि दक्षिण भारत के राज्यों में जन्मदर कम हो रही है और बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है। इसलिए दोनों मुख्यमंत्रियों ने लोगों से ज्यादा बच्चे पैदा करने की अपील की है। चंद्रबाबू नायडू ने तो यहां तक कहा है कि आगे से सिर्फ उन्हीं लोगों को चुनाव लड़ने की इजाजत मिलेगी, जिनके दो बच्चे होंगे। वे इसके लिए कानून लाने की बात...

  • हड़ताल से उभरे सवाल

    कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा बेहद जरूरी है, लेकिन यह बात भी ध्यान में रखनी होगी कि उद्यम रहेंगे, तभी रोजगार के अवसर बने रह पाएंगे। औद्योगिक विवाद असामान्य नहीं हैं, ना ही उनका समाधान संभावना की सीमा से बाहर है। तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में सैमसैंग कंपनी में कर्मचारियों की महीने भर से चल रही हड़ताल ने कुछ बुनियादी सवाल उठाए हैं, जिनका संबंध मौजूदा अर्थव्यवस्था के कई आयामों से है। इस संयंत्र के 1,300 कर्मचारियों ने नौ सितंबर को हड़ताल शुरू की थी। वे ज्यादा वेतन, बेहतर सुविधाओं, और ट्रेड यूनियन को मान्यता दिए जाने की मांग कर रहे...

और लोड करें