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बंगाल, असम में नहीं है पूरा मंत्रिमंडल

Kolkata, May 09 (ANI): BJP leader Suvendu Adhikari takes the oath as the first BJP Chief Minister of West Bengal, in Kolkata on Saturday. (ANI Photo)

दिल्ली की मीडिया में इस बात की कोई चर्चा नहीं है कि पश्चिम बंगाल और असम में मंत्रिमंडल का गठन कब होगा। सोचें, केरल में कांग्रेस को नेता चुनने में एक दो दिन ज्यादा समय लगा था। भाजपा ने जिस दिन असम में नेता चुना उसके दो दिन बाद कांग्रेस ने केरल में नेता चुन लिया। लेकिन देश का पूरा मीडिया यह बताने में लगा हुआ था कि कांग्रेस नेता नहीं चुन पा रही है। लेकिन जब नेता चुन लिया गया तो मुख्यमंत्री के साथ ही 21 सदस्यों के पूरे मंत्रिमंडल ने शपथ ली। शपथ से एक दिन पहले शाम में मनोनीत मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने सभी मंत्रियों के नाम का ऐलान कर दिया और सूची राज्यपाल को सौंप दी। वहां कुल 21 मंत्री बन सकते हैं और 21 मंत्रियों की शपथ हो गई। विभाग बंट गए हैं और सरकार ने काम शुरू कर दिया है।

इसके उलट पश्चिम बंगाल में नौ मई को मुख्यमंत्री के तौर पर शुभेंदु अधिकारी की शपथ हुई थी। उनके साथ चार मंत्रियों ने भी शपथ ली थी। भाजपा ने ऐसी गोपनीयता बरती कि मंच पर शपथ शुरू होने तक किसी को पता नहीं था कि कौन कौन मंत्री बन रहा है। शपथ के समय ही गोपनीयता भंग हुई और मुख्यमंत्री के साथ पांच लोगों ने शपथ ली। उसके बाद 13 दिन बीत गए लेकिन बाकी मंत्रियों की शपथ नहीं हुई है। राज्य में कुल 44 मंत्री हो सकते हैं लेकिन मुख्यमंत्री सहित सिर्फ छह लोग काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री अकेले 42 विभाग संभाल रहे हैं। किसी को जल्दी नहीं है मंत्रिमंडल गठन की। दिल्ली से लेकर बंगाल तक कोई सवाल नहीं उठा रहा है।

ऐसे ही असम में 13 मई को मुख्यमंत्री के रूप में हिमंत बिस्वा सरमा ने शपथ ली। उनके साथ कुल चार लोगों ने शपथ ली, जिसमें दो सहयोगी पार्टियों के नेता हैं। वहां भी नौ दिन हो गए हैं लेकिन मंत्रिमंडल का गठन नहीं हुआ है। असम में 18 मंत्री हो सकते हैं। लेकिन सरकार पांच लोगों से चल रही है। कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा है। ऐसे ही बिहार में भी सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार बनी तो 22 दिन तक मुख्यमंत्री सहित सिर्फ तीन लोगों ने सरकार चलाई। उसके बाद मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ। उधर केरल के बाद तमिलनाडु में भी मंत्रिमंडल का गठन हो गया है। ऐसा लग रहा है, जैसे भाजपा एक नई परंपरा लेकर आ रही है। यह तो नहीं ही कहा जा सकता है कि किसी तरह के विवाद की संभावना से देरी हो रही है। भाजपा में अब विवाद, मतभेद, अंदरूनी खींचतान जैसी चीजें अब लगभग खत्म हो गई हैं।

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