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केरल के राज्यपाल की अलग राजनीति

एक तरफ तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि अभिभाषण पढ़े बगैर विधानसभा के सत्र से निकल जाते हैं तो इस बार केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने अलग ही कमाल किया। उन्होंने अभिभाषण के दो पैराग्राफ के कुछ हिस्से पढ़े ही नहीं। उन्होंने अभिभाषण पढ़ा लेकिन दो हिस्से छोड़ दिए और चले गए। उनके चले जाने के बाद सरकार की ओर से बताया गया कि राज्यपाल ने पैरा नंबर 12 का शुरुआती हिस्सा और पैरा नंबर 15 का आखिरी हिस्सा नहीं पढ़ा है। इन दोनों पैराग्राफ में केंद्र सरकार की और उनकी खुद की आलोचना की गई है। उनके चले जाने के बाद इसे पढ़ा गया और सदन की कार्यवाही में शामिल किया गया। सोचें, इस तरह की बातों से क्या हासिल होता है?

बहरहाल, पैराग्राफ नंबर 12 में सरकार ने लिखा है कि केरल में कई तरह के नीतिगत सुधार हुए हैं लेकिन तमाम नीतिगत और संस्थागत उपलब्धियों के बावजूद केंद्र सरकार के विपरीत कदमों से केरल को वित्तीय मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं। इसमें आगे कहा गया है कि केंद्र सरकार का रवैया संघवाद के खिलाफ है। इसके बाद पैरा 15 में विधानसभा से पास हुए विधेयकों को रोके जाने का जिक्र है। गौरतलब है कि केरल में कई बार इसको लेकर टकराव हुआ है। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची है। पिछले राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के समय से ऐसा हो रहा है कि विधानसभा से पास हुए अनेक बिल राजभवन में अटक जाते हैं। केरल सरकार का कहना है कि इससे जन कल्याण के काम प्रभावित होते हैं। गौरतलब है कि तमिलनाडु और केरल दोनों राज्यों में अगले तीन महीने में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

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