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राहुल की चिट्ठी लिखने की राजनीति

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद से राहुल गांधी नए अवतार में हैं। वे लगातार यात्राएं कर रहे हैं और ऐसे इलाकों में जा रहे है, जहां हादसे या दंगे हुए हैं और सैकड़ों, हजारों लोग पीड़ित हुए हैं। सोशल मीडिया में बहुत से लोग इसे ‘ट्रैजडी टूर’ कह रहे हैं लेकिन हकीकत यह है कि इससे राहुल गांधी को तवज्जो मिल रही है। लोग उनकी चर्चा कर रहे हैं और उनकी छवि बदल रही है। एक अगंभीर नेता से जिम्मेदार और संवेदनशील नेता की छवि बन रही है। हाथरस से लेकर गुजरात और मणिपुर तक की यात्राओं में राहुल गांधी ने एक नया पहलू जोड़ा है, चिट्ठी लिखने का। वे चिट्ठियां लिख रहे हैं। बहुत साल पहले नेता लोग एक दूसरे को चिट्ठियां लिखते थे। अगर किसी मसले पर अहमति है तो उसे भी इन चिट्ठियों में लिखा जाता था और ये चिट्ठियां इतिहास की धरोहर बनती थीं। नेहरू और पटेल ने एक दूसरे को इतनी चिट्ठियां लिखी हैं कि उनकी कई किताबें बन गई हैं। अगर कोई उनकी चिट्ठियों को ही पढ़ ले तो उनके एक दूसरे का विरोधी होने की धारणा क्षण भर में ध्वस्त हो जाए।

बहरहाल, राहुल गांधी ने नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद कम से कम तीन चिट्ठियां लिखी हैं और चिट्ठी के रूप में ज्ञापन सौंपा है। वे सोमवार को मणिपुर के दौरे पर गए थे और जातीय हिंसा से सर्वाधिक प्रभावित चुराचांदपुर के पीड़ितों से मिल कर लौटते समय शाम पांच बजे के करीब राज्यपाल अनुसूइया उइके से मिले थे। उन्होंने राज्यपाल को एक ज्ञापन दिया, जो मूल रूप से एक चिट्ठी थी। उन्होंने इसमें मणिपुर का आंखों देखा हाल लिखा है और स्थायी शांति बहाली व पीड़ितों की मदद की अपील की है। इससे पहले राहुल ने 26 जून को नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद तीन चिट्ठियां लिखी हैं।

उन्होंने सबसे पहली चिट्ठी लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला को लिखी थी। असल में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए राहुल गांधी ने एक लंबा भाषण दिया था। वे एक घंटा 50 मिनट बोले थे और सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने के साथ साथ हिंदू और हिंसा को लेकर कुछ वैचारिक बातें भी कही थीं। उनके भाषण का बड़ा अंश बाद में हटा दिया था। राहुल ने चिट्ठी लिख कर स्पीकर से अपने भाषण के हटाए गए अंशों को फिर से बहाल करने की अपील की थी।

राहुल ने दूसरी चिट्ठी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी। प्रधानमंत्री मोदी ने दो जुलाई को लोकसभा में अभिभाषण पर चर्चा का जवाब दिया था। उसके बाद राहुल ने चिट्ठी लिख कर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए और नीट पेपर लीक पर चर्चा कराने की मांग की थी। उन्होंने इसकी जरुरत भी बताई थी। लोकसभा तीन जुलाई तक चलने वाली थी। लेकिन एक दिन पहले दो जुलाई को ही उसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। राहुल ने तीसरी चिट्ठी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखी। हाथरस में सत्संग में मची भगदड़ में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिजनों से मिलने के बाद राहुल ने योगी को लिखा कि पीड़ितों को जो मुआवजा मिला है वह बहुत कम है। ये चिट्ठियां दस्तावेज बनेंगी। ऐसे समय में जब ट्विटर पर ही सारे संवाद हो रहे हैं, राहुल ने चिट्ठी लिखना शुरू किया है।

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