चुनाव आयोग ने बिहार के बाद 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का काम किया। 11 राज्यों में सब कुछ पूरा हो गया लेकिन पश्चिम बंगाल में अब भी एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। इसे कौन सा चरण कहेंगे यह किसी को पता नहीं है। लेकिन चुनाव आयोग ने तार्किक विसंगति के नाम पर जिन 27 लाख लोगों के नाम काटे उनकी जांच का काम चल रहा है। उनकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 19 ट्रिब्यूनल बनवाए थे, जिनकी अध्यक्षता हाई कोर्ट के रिटायर जज कर रहे हैं। अभी इनमें एक दर्जन के करीब ट्रिब्यूनल काम कर रहे हैं।
इन न्यायाधिकऱणों ने अप्रैल के पहले हफ्ते में जांच शुरू की थी और सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये जैसे जैसे नाम क्लीयर करेंगे वैसे वैसे चुनाव आयोग उनको मतदाता सूची में शामिल करेगा। अभी तक की स्थिति यह है कि इन न्यायाधिकरणों ने करीब सात हजार नामों की जांच की है। सोचें, डेढ़ महीने से ज्यादा समय बीत गया है और अभी 27 लाख में से सात हजार नाम जांचे गए हैं। एक महीने में औसतन चार हजार नाम जांचे जा रहे हैं। इस गति से पांच साल में ढाई लाख के करीब नामों की जांच होगी। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की जरुरत है ताकि जल्दी से जल्दी सभी नामों की जांच हो और मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी हो।
