बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती को सिर्फ उत्तर प्रदेश के लोग ही नहीं, बल्कि देश के दूसरे राज्यों के लोग भी आदर से बहनजी कहते हैं। जैसे ममता बनर्जी को दीदी कहा जाता है। शिवराज सिंह चौहान अपने को मामा कहलवाते थे। जाहिर है इस तरह के संबोधनों का सचमुच की रिश्तेदारी से कोई मतलब नहीं होता है। तभी इसी तरह का एक विशेषण समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के लिए विकसित हुआ। वे बहुत युवा उम्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए थे। 2012 में जब वे सीएम बने तब उनकी उम्र 40 साल से कम थी। तभी उनको भैया कहा जाने लगा। अखिलेश भैया उनके लिए संबोधन बन गया। वैसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो उनको बबुआ बुलाते हैं। जब सपा और बसपा का तालमेल हुआ था तब मायावती और अखिलेश के लिए बुआ और बबुआ का विशेषण भाजपा ने ही विकसित किया था।
बहरहाल, अब मायावती के भतीजे और उनके घोषित उत्तराधिकारी आकाश आनंद को इस बात से दिक्कत है कि अखिलेश यादव को भैया क्यों कहा जाता है। उन्होंने अखिलेश की उम्र का हवाला देते हुए कहा कि वे अंकल हैं, भैया नहीं हैं। जाहिर है आकाश आनंद का इशारा अपनी उम्र की ओर था। वे खुद को युवाओं के भैया के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। असल में पूरे देश में इस समय जेन जी यानी 14 से 29 साल की उम्र के युवाओं को लुभाने की होड़ मची है। इसी होड़ में आकाश आनंद भी कूद गए हैं। उनको लग रहा है कि बाकी नेताओं के मुकाबले उनके पास उम्र का एडवांटेज हैं। वे पहले कभी चुनाव नहीं लड़े हैं और उम्र भी 30 के आसपास है। इसलिए वे जेन जी के साथ ज्यादा बेहतर ढंग से कनेक्ट कर पाते हैं। देखते हैं कि सचमुच के बुआ व भतीजे यानी मायावती और आकाश को कैसे बहन जी और भैया कहा जाता है।
