पश्चिम बंगाल की एक खास राजनीतिक संस्कृति है, जो शायद देश के किसी दूसरे राज्य में नहीं है। वहां जो भी हार कर सत्ता से बाहर होता है उसके खिलाफ ऐसा माहौल बनता है, जो उसके खत्म होने पर ही शांत होता है। जैसे कांग्रेस हार कर सत्ता से बाहर हुई तो उसी पूरी तरह से समाप्त किया गया। लेफ्ट जब हारी तो वह भी पूरी तरह से खत्म हुई और अब ममता बनर्जी की पार्टी हारी है तो उसके साथ भी वैसा ही हो रहा है। पूरी तरह से खत्म करने में कोई तरह के काम होते हैं। पार्टी टूटती है, विधायक व सांसदों के साथ साथ पार्टी का कैडर सत्तारूढ़ दल के साथ जाता है, हारने वाले के ऊपर बदले की भावना से कार्रवाई होती है औऱ शारीरिक हमले भी होते हैं।
माना जा रहा था कि भाजपा की सरकार बनेगी तो यह संस्कृति बदलेगी। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के ऊपर लगातार हमले हो रहे हैं और बदले की भावना से कार्रवाई हो रही है। पिछले दिनों तृणमूल के महासचिव अभिषेक बनर्जी के के कैमक स्ट्रीट स्थित ऑफिस के ऊपर लगे होर्डिंग को हटाने की एजेंसियां पहुंची थीं। उस दौरान दोनों पक्षों में टकराव हुआ। अब राज्य सरकार ने फायर सेफ्टी का हवाला देकर ऑफिस खाली करने को कहा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि भाजपा के पुराने नेता ऐसी बातों को लेकर सहज नहीं हैं। उनका कहना है कि चूंकि तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में आए नेता शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने हैं इसलिए वे अब भी उसी संस्कृति के हिसाब से काम कर रहे हैं। वे पुरानी पार्टी से बदला लेने की भावना से काम कर रहे हैं। लेकिन यह भी हकीकत है कि भाजपा का कोई बड़ा नेता उनको रोक भी नहीं रहा है।
