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केरल, तमिलनाडु के राज्यपाल क्या सबक लेंगे?

दिवाली की छुट्टियों पर जाने से पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के साथ साथ तमिलनाडु का मामला भी सुना और पंजाब की तरह ही इस तमिलनाडु को लेकर भी हैरानी जताई कि कैसे राज्यपाल विधानसभा से पास विधेयकों को रोक कर रखे रहते हैं। हालांकि पंजाब जैसी टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने नहीं की। पंजाब को लेकर तो चीफ जस्टिस ने यहां तक कहा कि क्या राज्यपाल को पता है कि वे आग से खेल रहे हैं? अदालत ने यह भी पूछा कि इस तरह विधानसभा से पास विधेयकों को अगर राज्यपाल अनिश्चितकाल के लिए रोक कर रखते रहे तो देश में कैसे लोकतंत्र बचेगा?

सवाल है कि क्या तमिलनाडु और केरल के राज्यपाल अदालत की इस टिप्पणी की गंभीरता को समझेंगे और विधेयकों का निपटारा जल्दी करेंगे? गौरतलब है कि दोनों राज्यों के कई कई विधेयक राज्यपालों के पास लम्बित हैं। तमिलनाडु सरकार ने तो सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि राज्य की विधानसभा से पास 12 विधेयक राज्यपाल के पास लम्बित हैं। यही हाल केरल का है। केरल सरकार भी इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पहुंची। पिछले दिनों इसी तरह महाराष्ट्र के स्पीकर के विशेषाधिकार का मामल सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था तो कोर्ट ने कई बार चेतावनी देने के बाद विधायकों की अयोग्यता पर फैसला करने की अंतिम तारीख तय कर दी। अगर राज्यपाल भी विधेयक इसी तरह से लटकाए रखते हैं तो क्या पता सुप्रीम कोर्ट को उसमें भी एक समय सीमा तय करनी पड़े।

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