यह एक पहेली है। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के सभी बड़े पदाधिकारी, जिसमें स्वंय संघ प्रमुख भी शामिल हैं, बार बार यह कहते हैं कि संघ को समझना मुश्किल है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इसी बात को हजारवीं बार इस रूप में कहा है कि संघ दुनिया का सबसे गलत समझा गया संगठन है। सवाल है कि ऐसा क्यों है? क्या संघ दुनिया का सबसे गलत समझा गया संगठन है? क्या ऐसा नहीं है कि बार बार आप जो कहते हैं कि संघ को समझना मुश्किल है उसी वजह से संघ को गलत समझा गया है? ध्यान रहे जब भी कहा जाता है कि संघ को समझना मुश्किल है तब यह समझाने का प्रयास नहीं किया जाता है कि संघ आखिर क्या है?
संघ या कोई भी संगठन क्वांटम फिजिक्स या स्पेस साइंस की तरह कोई जटिल चीज तो है नहीं, जिसे समझना मुश्किल है। जब आइंस्टीन ने अपने सबसे जटिल सिद्धांत यानी सापेक्षता के सिद्धांत को लोगों को समझाने में कामयाब हो गए और लोगों ने टाइम एंड स्पेस की थ्योरी समझ ली तो संघ कौन सी ऐसी चीज है, जिसे समझना मुश्किल है या हर बार लोग गलत समझ लेते हैं? सौ साल से संघ काम कर रहा है। सौवें साल में तो संघ प्रमुख का देश भर में बौद्धिक व्याख्यान हो रहा है। फिर भी लोग नहीं समझ पा रहे हैं कि संघ क्या है और समझ रहे हैं तो गलत समझ ले रहे हैं। इसका अर्थ है कि संघ ने खुद ही इतनी जटिलता बना रखी है, इतना उलझाव बना रखा है, अपने सिद्धांतों, विचारों व कार्यों में इतनी अस्पष्टता रखी है कि लोगों को समझने में मुश्किल होती है।
