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भाजपा और अकाली दल क्या साथ आएंगे?

पंजाब की लुधियाना वेस्ट सीट पर हुए उपचुनाव का नतीजा भाजपा और अकाली दल की राजनीति को बदलने वाला साबित हो सकता है। इस सीट पर उपचुनाव बहुत अहम था क्योंकि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा को उम्मीदवार बनाया था। अरोड़ा को 35  हजार से कुछ ज्यादा वोट मिले। उनको चुनौती दे रहे कांग्रेस के पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु को 24 हजार से कुछ ज्यादा वोट मिले। भाजपा तीसरे स्थान पर रही। उसके उम्मीदवार जीवन गुप्ता को 20 हजार 323 वोट मिले। चौथे स्थान पर रहे अकाली दल के परूपकार सिंह घूमन को 82 सौ वोट मिला। अगर भाजपा और अकाली दल साथ मिल कर लड़ते और दोनों को इतने ही वोट आते तो उनका उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहता और उसकी हार महज सात हजार वोट से होती।

तभी इस नतीजे के बाद एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल के साथ आने की चर्चा शुरू हो गई है। ध्यान रहे पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई थी। लेकिन साथ आने पर सहमति नहीं बनी। माना जा रहा है कि अकाली दल को अब भी लग रहा है कि किसानों में भाजपा को लेकर नाराजगी है। दूसरी बात यह कही जा रही है कि भाजपा अब अपने को तीसरे नंबर की पार्टी के तौर पर देख रही है और अकाली दल के साथ बराबरी का समझौता चाहती है। अभी तक अकाली दल की भूमिका बड़े भाई की होती थी। लुधियाना वेस्ट में भी भाजपा को 20 हजार और अकाली दल आठ हजार वोट मिले। बहरहाल, दोनों पार्टियां अगर आपस में तालमेल का कोई फॉर्मूला बनाती हैं तो अगले चुनाव में त्रिकोणात्मक मुकाबला बन सकता है और तब किसी भी पार्टी की लॉटरी खुल सकती है। क्योंकि अकाली और भाजपा के साथ आने पर उनकी ताकत आप और कांग्रेस के बराबर हो जाएगी और मुकाबला बराबरी का होगा।

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