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हेमंत क्या हरा पाएंगे भाजपा को?

Hemant Soren

झारखंड में हेमंत सोरेन क्या फिर भारतीय जनता पार्टी को हरा सकते हैं? यह सवाल राज्यसभा चुनाव को लेकर उठ रहा है। ध्यान रहे हेमंत सोरेन ने लगातार दो विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराया है। नरेंद्र मोदी के करिश्मे और अमित शाह के प्रबंधन के बावजूद 2019 और 2024 दोनों झारखंड मुक्ति मोर्चा ने जीत हासिल की। 2024 में तो पांच साल सरकार चलाने के बाद जेएमएम ने अपनी सीटें बढ़ा कर जीत हासिल की। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी जेएमएम और कांग्रेस गठबंधन वे भाजपा को झटका दिया। राज्य की सभी आदिवासी आरक्षित सीटों पर गठबंधन जीता, जबकि लोकसभा चुनाव के समय हेमंत सोरेन जेल में थे। उनको ईडी ने गिरफ्तार किया था। ममता बनर्जी के बाद हेमंत सोरेन इकलौते नेता हैं, जिन्होंने भाजपा को टक्कर दी है। अब राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव में हेमंत के प्रबंधन और राजनीति दोनों की परीक्षा होनी है।

हालांकि भाजपा सीधे तौर पर राज्यसभा का चुनाव नहीं लड़ रही है लेकिन उसने रिलायंस समूह के प्रेसिडेंट और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन दिया है। नाथवानी पहले दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। अभी वे आंध्र प्रदेश से उच्च सदन के सदस्य हैं। दूसरी ओर हेमंत सोरेन ने अपनी पार्टी से दलित समाज के बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है और कांग्रेस ने एआईसीसी के सचिव प्रणव झा को टिकट दिया है। पहले हेमंत सोरेन इस बात से नाराज थे कि कांग्रेस ने एकतरफा तरीके से टिकट की घोषणा कर दी। लेकिन अब बताया जा रहा है कि भूपेश बघेल और अजय शर्मा से बातचीत के बाद हेमंत साझा लड़ाई के लिए तैयार हो गए हैं।

जेएमएम, कांग्रेस, राजद और लेफ्ट गठबंधन के पास 56 विधायक हैं और दो सीटें जीतने के लिए इतने ही विधायक की जरुरत है। दूसरी ओर भाजपा के पास 21 विधायक हैं। इसके अलावा लोजपा, जदयू और आजसू के तीन विधायक हैं। इस तरह एनडीए की कुल संख्या 24 है। झारखंड लोकतांत्रिक मोर्चा के जयराम महतो भी एक विधायक हैं। अगर उनको एनडीए के साथ जोड़ें तो संख्या 25 होती है। यानी भाजपा के प्रबंधकों और परिमल नाथवानी को कम से कम तीन अतिरिक्त विधायकों की जरुरत होगी। ध्यान रहे हेमंत सोरने परफेक्ट कोऑर्डिनेशन की सरकार चला रहे हैं। सभी 56 विधायकों पर अपना असर है और वे उनकी बात मानते हैं। सबको लगता है कि हेमंत सोरेन के साथ रहे तो आगे भी जीतेंगे। तभी अगर उन्होंने मेहनत की तो एनडीए का प्रबंधन और धन दोनों रखा रह जाएगा। इस लिहाज से झारखंड का चुनाव बड़ा चुनाव है। हेमंत अगर भाजपा और रिलायंस दोनों को हराते हैं तो उनका कद बहुत बढ़ेगा।

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